मुख्यपृष्ठस्तंभमेहनतकश : जीवन में जो कुछ भी ठाना उसे किया पूरा

मेहनतकश : जीवन में जो कुछ भी ठाना उसे किया पूरा

रवींद्र मिश्रा

‘शादी तभी करूंगा, जब गांव में बैठका बनवाऊंगा!’ यह उस नौजवान का संकल्प था, जिसका बचपन गांव के किसान परिवार में अभाव में बीता। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की केराकत तहसील के गोबरा गांव में पैदा हुए विजय मिश्र बचपन से ही जिद्दी स्वभाव के थे। वो जिस काम को करने की ठान लेते उसे पूरा किए बिना चैन से नहीं बैठते। जौनपुर के टी.डी. कॉलेज से मास्टर की डिग्री प्राप्त करनेवाले विजय आईएएस बनना चाहते थे। सिविल सर्विस की परीक्षा में असफल होने पर रोजी-रोटी की तलाश में विजय मुंबई आए और मालाड (पूर्व) कुरार विलेज में अपने दोस्तों के साथ किराए के मकान में रहने लगे। रोजाना कहीं-न-कहीं कोई इंटरव्यू देते। दो महीने बाद आयात-निर्यात कंपनी में उन्हें काम मिला। एमबीए की पढ़ाई कर चुके विजय अपने मिलनसार व्यक्तित्व तथा कर्मठता के चलते कंपनी में अच्छे ओहदे पर काम करने लगे। लड़का अच्छा कमा रहा है ये देख पिता ने गांव में शादी तय कर दी। लेकिन विजय ने अपने पिता से कहा कि शादी तभी करूंगा, जब गांव में बैठका बनवाऊंगा। खैर, अपने पास खर्च के लिए कुछ रुपए रखकर वेतन से बचाए गए रुपयों से उन्होंने बैठका बनवाने के बाद शादी की। पत्नी को मुंबई लाने के बाद एक चाल में किराए की खोली लेकर रहने लगे। एक साल बाद बेटा पैदा हुआ और चाल में पर्याप्त सुविधा न होने पर विजय ने निर्णय लिया कि अब उनका बेटा यहां नहीं पलेगा। बैंक से लोन लेकर उन्होंने मीरा रोड में वन बीएचके का कमरा खरीद लिया। गांव में बीएससी की पढ़ाई पास किए छोटे भाई पंकज को भी मुंबई बुला लिया और वो किसी मेडिकल कंपनी में एमआर बन गया। आज पंकज जौनपुर के जजेस कॉलोनी में बने खुद के मकान में परिवार के साथ रहकर अपना व्यवसाय कर रहा है। विजय का बेटा एमबीए करने के बाद एक अच्छी कंपनी में काम कर रहा है। छोटा इंटर की पढ़ाई कर रहा है। एक इंटरनेशनल कंपनी में निर्यात मैनेजर का काम करनेवाले विजय हृदय से कवि और गायक भी हैं। उन्होंने विविध भोजपुरी फिल्मी एलबम भी तैयार किए हैं, जिसमें २००९ में बनाया गया भोजपुरी एलबम ‘धोती झाड़ के’ खूब प्रसिद्ध हुआ। आज वे कुछ फिल्मों में गीत, कहानी तथा पटकथा लिख रहे हैं। उनके द्वारा गाए गए कुछ भजन मॉरिशस के एफएम रेडियो पर प्रसारित होते हैं, जिसकी उन्हें रॉयल्टी भी मिलती है। मिलनसार व्यक्तित्व एवं धार्मिक प्रतिभा के धनी विजय जहां रहते हैं, वहां उन्होंने एक शिवजी का मंदिर भी बनवा दिया है। इसलिए कहते हैं कि अगर इंसान में कुछ करने की इच्छाशक्ति है तो उसके लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में लिखा है- जो इच्छा करिहो मन माहीं। प्रभु प्रताप कुछ दुर्लभ नाहीं।

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