मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनामेहनतकश: नौकरी की उम्र में दे रही हैं दूसरों को ट्रेनिंग

मेहनतकश: नौकरी की उम्र में दे रही हैं दूसरों को ट्रेनिंग

आनंद श्रीवास्तव
वर्ष २००५ में राजस्थान के पाली जिले के भारुंडा गांव से मुंबई आकर अपना करियर बनानेवाली प्रीति परमार कम उम्र में ही उस मुकाम पर पहुंच गईं, जिसे पाने के लिए लोग मानते हैं कि बड़ा अनुभव और पहुंच होनी चाहिए। प्रीति स्क्वॉड्रन अकादमी की संस्थापक हैं, जिसके तहत वे युवाओं को फौज में जाने की ट्रेनिंग देती हैं। उनके साथ एक पूरी टीम खड़ी है, जो इस काम को अंजाम देती है। आज वो स्थापित हो चुकी हैं और कई छात्र उनकी अकादमी से ट्रेनिंग ले रहे हैं। हालांकि, कुछ वर्ष पहले ऐसा नहीं था। प्रीति के अनुसार, उनके पिता जगदीश परमार का अपना छोटा-सा कपड़ों का उद्योग है। उनकी माता गृहिणी होने के साथ ही इनकी प्रेरणास्रोत हैं, वो भी पिताजी के साथ उद्यम को संभाल रही हैं। प्रीति कहती हैं, `मध्यम परिवार से होने के बावजूद माता-पिता ने उनकी शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। स्कूल स्तर की शिक्षा सीताराम पोद्दार बालिका विद्यालय (मुंबई) से पूरी की। दसवीं में अच्छे अंकों के साथ पास होने और स्कूल में पहला क्रम आने पर उच्च शिक्षा के लिए मुंबई स्थित के.सी. कॉलेज में दाखिला लिया और जीवन के एक अहम पड़ाव की शुरुआत की। वहां मैंने साहित्य में बीए और उसके बाद एमए किया। इस शैक्षिक यात्रा में मेरे गुरुजी डॉ. शीतला प्रसाद दुबे एवं डॉ. अजीत राय का आशीर्वाद और मार्गदर्शन मिला, जिसकी बदौलत मैं स्नातक एवं स्नातकोत्तर में पहला रैंक लाने में कामयाब रही। के.सी. कॉलेज के साथ ही मैंने एसएनडीटी कॉलेज से एनसीसी की ट्रेनिंग पूरी की। इस ट्रेनिंग के बाद फौज में शामिल होने का प्रयास किया तो पता चला कि इसके लिए एक विशेष ट्रेनिंग की जरूरत पड़ती है और मैंने ट्रेनिंग भी की। इसके बाद मन में खयाल आया कि क्यों न उन युवाओं को ट्रेनिंग देने का काम शुरू किया जाए जो फौज में शामिल होने का सपना देखते हैं। लेकिन जानकारी के अभाव में उस सपने को साकार नहीं कर पाते हैं। बस यहीं से स्क्वॉड्रन अकादमी की शुरुआत हुई।’
प्रीति परमार कहती हैं कि मुझे मेरे जीवन में कुंवर नारायण जी की कविता `अंतिम ऊंचाई’ ने बहुत प्रभावित किया है। पहले से ही कुछ अलग-सा कर दिखाने की चाह, एक पागलपन और फौज में जाने के सपने ने मुझे हमेशा देशसेवा के लिए प्रेरित किया है। मेरे अंदर हमेशा से ही सीखने की ललक रही है। सफलता की राह में कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है। हमें भी करना पड़ा। किसी भी उद्यम को शुरू करने में सबसे बड़ी चुनौती होती है कैपिटल और इन्वेस्टमेंट की और शुरुआत में हमारे पास इसी चीज की कमी थी। हमने ये अकादमी शून्य इन्वेस्टमेंट से शुरू की। इस संस्था को शुरू करने में इसके सह-संस्थापक शुभम मिश्रा ने अहम भूमिका निभाई। आखिरकार, प्रीति का सपना पूरा हुआ। प्रीति कहती हैं, `जब इस कोर्स को शुरू करने के बारे में सोचा था, तब ये सपना लग रहा था, लेकिन आज हकीकत है तो बहुत खुशी हो रही है। हालांकि, मेरे सपने पूरे नहीं हुए हैं, मंजिल अभी भी दूर है। अभी तक हमने केवल पहली सीढ़ी पार की है। अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है। मेरा सपना अकादमी को देश के हर कोने में पहुंचाना है, ताकि कोई भी बच्चा अपने सपने से वंचित न रह जाए।’

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