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मेहनतकश: कभी करते थे कारखाने में मजदूरी आज दे रहे हैं ५०० लोगों को रोजगार

अशोक तिवारी

फिल्म ‘डॉन’ में सदी के ‘महानायक’ अमिताभ बच्चन पर एक गाना फिल्माया गया था, जिसके बोल थे ‘ई है मुंबई नगरिया तू देख बबुआ, सोने चांदी की डगरिया तू देख बबुआ।’ फिल्म ‘डॉन’ के इस गीत के बोल आजमगढ़ निवासी आनंद मिश्रा पर सटीक बैठते हैं। आनंद मिश्रा की कहानी भी किसी फिल्म की कहानी से कुछ कम नहीं है, जहां मुंबई शहर ने उन्हें फर्श से उठाकर अर्श पर बिठा दिया। आजमगढ़ जिले के गोडहरा गांव के रहनेवाले आनंद रामा मिश्रा ने उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल यूनिवर्सिटी से बीए तक की पढ़ाई की थी। आनंद मिश्रा के पिताजी मुंबई शहर में रहते थे और एक कारखाने में मजदूरी करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए वर्ष १९९८ में आनंद मिश्रा आजमगढ़ से मुंबई आ गए। मुंबई आने के बाद उनके सामने रोजगार की समस्या खड़ी हुई तो पिता ने उन्हें कारखाने में मजदूरी के काम पर लगा दिया। कारखाने में मजदूरी का काम कर रहे आनंद मिश्रा मन ही मन इस बात को लेकर चिंतित थे कि उनकी पढ़ाई के अनुसार उन्हें कोई काम नहीं मिल रहा है। करीब एक साल तक मजदूरी करने के बाद आनंद मिश्रा को एक मार्वेâटिंग कंपनी में सर्वे करने का काम मिला, जिसमें पब्लिक का इंटरव्यू लेकर किसी भी प्रोडक्ट के बारे में जानने की कोशिश की जाती थी। एक मामूली सर्वेयर के रूप में अपने करियर को शुरू करनेवाले आनंद मिश्रा अपनी मेहनत के बल पर कंपनी के सबसे ऊंचे ओहदे तक पहुंच गए। करीब १० वर्षों तक विभिन्न कंपनियों में ऊंचे पदों पर काम करने के बाद आनंद मिश्रा ने खुद की कंपनी खोली, जिसका नाम ‘वायर एक्सिक्स प्राइवेट लिमिटेड’ है। वर्तमान में आनंद मिश्रा इस कंपनी के फाउंडर डायरेक्टर हैं। इस कंपनी में आज करीब ५०० लोग काम करते हैं। इतने लोगों को रोजगार देने का गर्व आनंद मिश्रा के हृदय में है। आनंद मिश्रा का कहना है कि बेरोजगारी का आलम उन्होंने करीब से देखा है और गरीबी भी देखी है। आज जब वे युवाओं को रोजगार देते हैं तो उन्हें लगता है कि समाज का कुछ कर्ज इस माध्यम से वे उतार पा रहे हैं। आनंद मिश्रा का सपना है कि उनकी कंपनी की शाखाएं पूरे भारत में खुलें और जिसमें कम से कम ५०,००० बेरोजगारों को वे रोजगार मुहैया करा सकें और देश की इकोनॉमी में एक सक्रिय योगदान दे सकें। इसके अलावा आनंद मिश्रा को मुंबई शहर से बहुत प्यार है। उनका कहना है कि सचमुच मुंबई शहर का दिल बहुत बड़ा है जो भारत के कोने-कोने से आनेवाले आम लोगों को सिर्फ पनाह ही नहीं देता, बल्कि उनके सपनों को भी साकार करता है।

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