मुख्यपृष्ठस्तंभमेहनतकश : बचपन से शुरू हुआ संघर्ष आज भी है कायम

मेहनतकश : बचपन से शुरू हुआ संघर्ष आज भी है कायम

अनिल मिश्र

किसी भी कार्य को छोटा या बड़ा न मानते हुए हर कार्य को मेहनत व लगन से करनेवाले सुरेश चौहान न केवल हंसमुख व्यक्तित्व के धनी हैं, बल्कि हर किसी की मदद के लिए वे सदैव तत्पर रहते हैं। समाज के हर तबके के बीच अपनी अच्छी पैठ बनानेवाले सुरेश चौहान के पिता रामचंद्र चौहान सेंचुरी रेयान में काम करते थे। मेहनतकश पिता की मेहनत को देख बचपन से ही मेहनत को ही अपना आदर्श बनानेवाले सुरेश चौहान आज भी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। अपनी मेहनत के बलबूते उन्होंने उल्हासनगर शहर में ऐसी व्यवस्था कर ली है, ताकि घर बैठे उनके परिवार का खर्च चल सके।
उल्हासनगर में कक्षा तीसरी की पढ़ाई करनेवाले सुरेश चौहान पढ़ाई करने के साथ-साथ घर की किराने की दुकान को संभालते थे। दीपावली, गणपति जैसे त्योहारों के दौरान पटाखे बेचनेवाले सुरेश चौहान ने एक दुकान लेकर हाथ से साड़ी पर एम्ब्रॉयडरी का कार्य करते हुए अपने इस काम को आगे बढ़ाया। लेकिन इस क्षेत्र में बंगाली कामगारों के आने से जब कमाई कम हो गई तो उन्होंने उसे छोड़कर टीवी और वीसीआर किराए पर देने का काम शुरू किया। कुछ समय तक तो यह कार्य ठीक ढंग से चला, उसके बाद उन्होंने १९९३ में केबल और टीवी व्यवसाय में कदम रखा। टीवी रिपेयरिंग के साथ ही अब उन्होंने पुरानी टीवी को बेचना और खरीदना शुरू कर दिया। इसी के साथ उनका केबल का व्यवसाय समाप्ति के कगार पर है। इसके बाद २००३ में सेंचुरी रेयान के एटी विभाग में उन्होंने दो वर्षों तक लेबर का कार्य किया। लेकिन कड़ी मेहनत के बावजूद कंपनी में घुटन जैसा महसूस होने पर उन्होंने उस कार्य को छोड़ दिया और कंस्ट्रक्शन लाइन में अपना भाग्य आजमाया, जिसमें उन्हें काफी हद तक सफलता भी मिली। लेकिन आज सुरेश चौहान कई प्रतिष्ठित अखबारों में पत्रकारिता कर रहे हैं। घर में पत्नी आरती व दो लड़के व एक लड़की है। परिवार को आगे ले जाने में उन्हें पत्नी आरती का काफी सहयोग मिला। अपनी मेहनत के बलबूते अपने बच्चों को उच्च शिक्षा देकर उन्हें अच्छे मुकाम पर पहुंचानेवाले सुरेश चौहान का बड़ा बेटा संदीप आज फार्मासिस्ट है तो छोटे बेटे दीपक ने एमबीए की पढ़ाई पूरी कर नौकरी की शुरुआत की है। वहीं बेटी नीट की तैयारी कर रही है। जीवन में आए काफी उतार-चढ़ावों के बीच संघर्ष करनेवाले सुरेश चौहान को ऊपरवाले ने जितना भी दिया है, उसमें वे बेहद खुश हैं। अपनी मेहनत के बल पर समाज में अपनी पहचान बनानेवाले सुरेश चौहान ने उल्हासनगर सहित अपने गांव आजमगढ़ स्थित अपने पुश्तैनी मकान को आज भी संभालकर रखा है। सुरेश चौहान का कहना है कि इस महंगाई के दौर में वो आज भी संघर्ष कर रहे हैं। चौहान समाज को आगे ले जाने के अपने दायित्व को समझते हुए वे दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। आए दिन परिवार और समाज के साथ तीर्थयात्रा करनेवाले सुरेश चौहान धार्मिक प्रवृत्ति के इंसान हैं और जीवन में आए सुख और दुख को ऊपरवाले का आशीर्वाद मानकर आगे बढ़ रहे हैं।

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