मुख्यपृष्ठस्तंभमेहनतकश : सेवानिवृत्त होने के बाद भी कर रहे हैं काम

मेहनतकश : सेवानिवृत्त होने के बाद भी कर रहे हैं काम

बचपन से ही विभिन्न कार्यों को करनेवाले कैलाश चिंतामणि तिवारी ने कभी किसी काम को छोटा नहीं समझा और बेस्ट इलेक्ट्रिकल से फोरमैन अर्थात निरीक्षक पद से सेवानिवृत हुए। सेवानिवृत्त होने के बाद भी लोगों को आज वो स्वस्थ, मस्त व व्यस्त रहने का संदेश दे रहे हैं।
कैलाश तिवारी जौनपुर जिले के मड़ियाहूं तहसील के तीवरान (नेवढीया) के निवासी हैं। सातवीं तक गांव में पढ़ाई करने के बाद अपने पिता के पास वे मुंबई के परेल इलाके के बीईएसटी क्वॉर्टर में आ गए। उनके पिता बेस्ट में स्टाटर थे। पिता के पास रहकर उन्होंने न केवल घर का काम किया, बल्कि बीएससी तक की पढ़ाई की। शिक्षा ग्रहण करने के दौरान नागरिक संरक्षण दल का प्रशिक्षण लेनेवाले कैलाश तिवारी को दुख है कि वे नागपुर का फायर प्रशिक्षण नहीं ले सके। पढ़ाई के बाद वैâलाश तिवारी को जब तक उचित नौकरी नहीं मिली तब तक उन्होंने क्लर्क, दवा, गैरेज सहित कई जगहों पर काम किया। पिता की जगह बेस्ट परिवहन में उन्हें हेल्पर की नौकरी मिली और वहां वे बेस्ट में टायर बदलने और पेंटिंग जैसा काम करने लगे। बेस्ट में कार्य करने के दौरान उन्होंने वायरमैन की परीक्षा औद्योगिक पशिक्षण केंद्र (आईटीआई), अंबरनाथ से दी। इसके बाद बस की लाइट व्यवस्था सुधारने के साथ-साथ फोरमैन की पदोन्नति उन्हें मिली। सेवानिवृत्त होने के बाद भी वैâलाश तिवारी आज घर में बैठने की बजाय कुछ न कुछ कार्य कर रहे हैं। कैलाश तिवारी का कहना है कि व्यक्ति नौकरी से सेवानिवृत्त होता है अपने काम से नहीं। इंसान को मरते दम तक अपने शरीर से काम लेना चाहिए और सेवानिवृत्त नहीं होने देना चाहिए। कैलाश तिवारी आज कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में काम करते हुए रिटायर्ड लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत कैसे हों और आगे का जीवन कैसे सुखमय हो इस विषय पर प्रशिक्षण दे रहे हैं। कैलाश तिवारी कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति रिटायरमेंट के बाद जब तक व्यस्त नहीं होगा वो स्वस्थ और मस्त नहीं हो सकता। रिटायरमेंट के बाद शरीर की हलचल बंद सी हो जाती है, जिसके कारण वो चिंता में पड़ जाता है। चिंता और तनाव के कारण तरह-तरह की व्याधियां शरीर में उत्पन्न होने लगती हैं।
रिटायरमेंट के बाद भी कैलाश तिवारी दो बेटों और दो बेटियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहे हैं। इसके साथ ही वे लोगों को तनाव से दूर रहने का मंत्र दे रहे हैं और लोगों को प्रशिक्षित कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रहे हैं। ६४ बसंत देख चुके वैâलाश तिवारी अपने परिवार के लिए ही नहीं अपने आस-पास के पर्यावरण को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए पेड़ लगाने के साथ ही उसके संरक्षण का भी प्रयास करते रहते हैं।

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