मुख्यपृष्ठस्तंभमेहनतकश : छोटी-सी उम्र में शुरू किया बड़ा बिजनेस!

मेहनतकश : छोटी-सी उम्र में शुरू किया बड़ा बिजनेस!

आनंद श्रीवास्तव

सातारा जिले से मुंबई आए उदय सर्वगोड काफी कम उम्र में ही बिजनेसमैन बन गए। उम्र के सोलहवें साल में पहली बार उन्होंने इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्ट लिया था। इसके बाद से यह सिलसिला ही चल पड़ा। मुंबई के विक्रोली स्थित छोटे से घर में अपने माता-पिता और छोटे भाइयों के साथ रहनेवाले उदय सर्वगोड के पिता रेल विभाग में नौकरी करते थे। उन्होंने ही यह घर बनाया था। उनके देहांत के बाद बड़े से परिवार की सारी जिम्मेदारी उदय सर्वगोड पर ही आ गई थी। इलेक्ट्रिकल में डिप्लोमा के बाद नौकरी करने के बजाय उन्होंने अपना खुद का व्यवसाय करने का पैâसला किया। शुरुआत में उन्हें काफी दिक्कत हुई।
कुछ साल के बाद पार्टनरशिप टूट गई और उदय सर्वगोड ने अपना खुद का इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्ट का काम शुरू किया। यहीं से किस्मत ने करवट बदली और वह अपनी मेहनत, लगन और ईमानदारी के कारण काफी कम समय में एक सफल इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्टर बन गए। उदय सर्वगोड यहीं तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने मात्र २१ साल की उम्र में सर्वगोड एंटरप्राइसस नामक एक कंपनी शुरू की, जिसके तहत कई तरह के व्यवसाय की नींव डाली। इस बैनर के तहत उन्होंने सर्वगोड फूड कंपनी, सर्वगोड चहा और सर्वगोड आटा का व्यवसाय शुरू किया। इसके शुरू करने के कुछ ही दिनों के भीतर ये सभी उपक्रम तेजी से चलने लगे। कोविड-१९ महामारी से ठीक पहले उनके द्वारा शुरू सर्वगोड चहा लोगों की पहली पसंद बन गई थी।
कुछ ही दिनों में इसके दो नए ब्रांच भी शुरू हो गए थे, लेकिन कोविड महामारी के दौरान लॉकडाउन के चलते सभी ब्रांच बंद करने पड़े थे। इससे उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान भी हुआ था, लेकिन उन्होंने दोबारा से इसे स्थापित करने का प्रण लिया था। जब सब कुछ नॉर्मल हो गया तब फिर एक बार सर्वगोड चहा अपने ग्राहकों के लिए मार्केट में आ गया है।
बता दें कि काफी कम समय में अपने आप को व्यवसाय क्षेत्र में स्थापित करनेवाले उदय सर्वगोड को कई संस्थाओं ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया है। अब तक उन्हें विविध संथाओं से लगभग २५ पुरस्कार मिल चुके हैं। पहली बार उन्हें वर्ष २०१९ में टिटवाला योग ट्रस्ट द्वारा ‘नव उद्योग अवार्ड’ प्रदान किया गया था, जिसके बाद तो यह सिलसिला ही शुरू हो गया। वे कहते हैं कि आज मैं जिस मुकाम पर पहुंचा हूं, इसके पीछे मेरा माता-पिता और परिवारवालों के साथ-साथ मेरे शुभचिंतकों द्वारा दिखाया गया विश्वास व तन-मन-धन से दिया गया उनका साथ है। यदि मेरे घरवालों ने कम उम्र में मेरा हौसला नहीं बढ़ाया होता तो मैं भी कहीं कोई छोटी-मोटी नौकरी कर रहा होता।
मैंने रिस्क उठाया, निश्चय किया और मेहनत करते हुए आगे बढ़ता चला गया। कई संस्थाओं ने मेरी इस सफलता की कहानी को नव युवकों के सामने मार्गदर्शक के रूप में पेश किया है। मैं हमेशा नवयुवकों से कहता हूं कि सबसे पहले अपना एक लक्ष्य तय करो। यदि असफल हुए तो भी रास्ता मत छोड़ो, एक दिन सफलता जरूर आपके कदम चूमेगी।

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