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मेहनतकश: पर्यावरण के लिए समर्पित जीवन

अनिल मिश्र

देश की संख्या भले ही डेढ़ अरब के करीब पहुंच गई हो, लेकिन इतनी बड़ी आबादी में कुछ ही लोग ऐसे होते हैं, जो अपना जीवन अपने लिए नहीं, बल्कि पर्यावरण को समर्पित कर देते हैं। उन्हीं में से एक हैं ज्ञानेश्वर उर्पâ काका देशमुख, जो महाराष्ट्र सरकार के लेखा परीक्षक विभाग से सेवानिवृत होकर पर्यावरण की रक्षा के लिए बदलापुर नपा प्रशासन के साथ काम कर रहे हैं। उनके काम को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि पर्यावरण की रक्षा के लिए काका देशमुख ने अपना जीवन न्योछावर कर दिया है। काका देशमुख कहते हैं कि उनके काम से उनकी पत्नी बहुत डरती थी कि कहीं गलत कार्यों में लिप्त लोग गुंडों या कोई और पुलिस के बल पर तकलीफ दे सकते हैं। इस बात को लेकर वह हमेशा काका देशमुख को टोका करती थीं, लेकिन पत्नी के निधन के बाद काका देशमुख पूरी तरह से अपने काम के प्रति समर्पित हो चुके हैं। काका देशमुख कहते हैं कि उन्हें गुंडों और बिल्डरों से कई बार धमकी मिल चुकी है लेकिन वे बिना डरे काम करते रहते हैं। वे कहते हैं कि पर्यावरण का हानि पहुंचाने वालों का विरोध करना हर जागरूक नागरिक का कर्तव्य बनता है। काका देशमुख कहते हैं कि बदलापुर के कुछ बिल्डर टाइप के राजनीतिज्ञ लोग प्राकृतिक नाले को खत्म करने में लगे हैं। वे पेड़ काट देते हैं, नाले के आस-पास उगनेवाली वनस्पति का विनाश कर रहे हैं। आज पर्यावरण के भक्षक वही लोग हैं, जो अपने आपको सेवक बताते हैं। बदलापुर में बढ़ते सिमेेंंट के जंगल ने प्रदूषण को बढ़ा दिया है। बदलापुर में कुल ९ नाले हैं, जिनमें से सात नाले प्राकृतिक हैं, तो दो नाले बरसाती हैं। नियम कहता है कि कोई भी निर्माण नाले से ५०० मीटर की दूरी पर ही किया जाना चाहिए। परंतु शहर के भवन निर्माता नियम को ताक पर रख कर मनपा के अधिकारियों की जेब गर्म कर अवैध रूप से काम करते हैं। काका देशमुख बताते हैं कि मैं जमकर इन कार्यों का विरोध करता हूं। नदी, नालों को भू माफियाओं, बिल्डरों से बचाने के लिए प्रशासन से आए दिन पत्र व्यवहार करते रहता हूं। बदलापुर में ११ वर्षों से नगरविकास रचना नहीं है। चार वर्षों से नगरसेवक नहीं हैं, प्रशासक हैं, जिन्हें दबंग बिल्डर टाइप के राजनीतिज्ञ लोग नहीं मानते हैं। काका देशमुख बदलापुर गांव के मूल निवासी हैं। उनके दो बच्चे हैं। एक लड़का और एक लड़की। सभी लोग पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। काका देशमुख ने ‘नमस्ते बदलापुर’ नाम से एक संस्था खोल रखी है, जिसके अंतर्गत सैकड़ो लोग काम करते हैं और बदलापुर में होने वाले प्रकृति के खिलाफ काम का विरोध करते हैं। वे कहते हैं कि प्रकृति को सबसे अधिक बिल्डरों द्वारा नुकसान पहुंचाया जाता है। जब तक चुनाव नहीं होता और जब तक जनप्रतिनिधि चुनकर नहीं आते, तब तक शहर पर दुष्परिणाम डालने वाले प्रोजेक्टों पर पाबंदी लगा देनी चाहिए। इन दिनों नालों को खत्म करने का सिलसिला शुरू है। नाले के पानी को बहने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलने से आस-पास की इमारतों में पानी जाएगा, जिससे जनधन का भारी नुकसान होगा।

(यदि आप भी मेहनतकश हैं और अपने जीवन के संघर्ष को एक उपलब्धि मानते हैं तो हमें लिख भेजें या व्हाट्सऐप करें।)

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