मुख्यपृष्ठनए समाचारमेहनतकश : बेटी को डॉक्टर तो बेटे को इंजीनियर बनाने का लक्ष्य

मेहनतकश : बेटी को डॉक्टर तो बेटे को इंजीनियर बनाने का लक्ष्य

राम दिनेश यादव

अपनी बेबसी और मुफलिसी से परेशान होकर १५ वर्षीय युवक ने जब अपने गृहराज्य बिहार से रोजी-रोटी की तलाश में देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कदम रखा तो मायानगरी ने उसे वो सब कुछ दिया, जिसके सपने उसकी आंखों में थे। बिहार के मुज्जफरपुर जनपद निवासी प्रशांत जायसवाल आज ४५ वर्ष के हो चुके हैं।
मुंबई में बीते तीस वर्षों में उन्होंने अपनी ईमानदारी, लगन व कुछ कर गुजरने का जुनून लेकर अपना ही नहीं, बल्कि गांव में उन पर आश्रित रहनेवाले अभिभावकों की भी जरूरतों को पूरा करने का हरसंभव प्रयास किया। प्रशांत जायसवाल बीते दिनों को याद कर बताते हैं कि कुछ हासिल होने की उम्मीद में वो दिन-रात में कोई फर्क न कर सिर्फ काम की तलाश और उसे पूरा करने की कवायद में जुटे रहते थे। बेहद कठिनाइयां झेलने के बावजूद हर तरह के लोगों से उनका सामना हुआ लेकिन अपने सपने को उन्होंने मरने नहीं दिया। धीरे-धीरे अपनी कड़ी मेहनत और ईमानदारी से दुर्भाग्य को परे धकेलते हुए सौभाग्य को वो अपनी चौखट पर ले आए। कुछ वर्षों के अथक प्रयासों के बाद उनके पास रुपए जुटने शुरू हो गए। धीरे-धीरे बचाए हुए पैसों को जोड़कर प्रशांत ने होलसेल की दुकानों से वस्तुओं को खरीदना और उन वस्तुओं को छोटे-छोटे दुकानदारों को बेचना शुरू किया।
गौरतलब हो कि कुछ साल बाद कुछ ब्रांड्स की एजेंसी और कुछ सप्लायरों को वेतन पर रखकर मीरा रोड-भायंदर में प्रशांत प्रोडक्ट बिकवाने लगे। पहले से बनी गुडविल ने उनका साथ दिया और बिजनेस चल पड़ा, कुछ वर्षों में ही बड़े स्तर पर कामकाज हो जाने से आर्थिक स्तर पर और मजबूती मिली। इसके बाद मीरा-भायंदर नगरपालिका में कॉन्ट्रेक्ट लेकर उन्होंने कार्य करवाना शुरू किया। आज एक सफल व्यवसायी के साथ ही मीरा-भायंदर के अच्छे ठेकेदारों में गिने जानेवाले प्रशांत जायसवाल बताते हैं कि जब वो बिहार से मुंबई १५ वर्ष की उम्र में आए तो भले ही उन्होंने बहुत तकलीफें झेली लेकिन मुंबई ने उनके परिश्रम का उन्हें भरपूर परिणाम भी दिया। आज कई ब्रांडों की एजेंसी होने के साथ प्रशांत मीरा-भायंदर में वर्षों से कांट्रेक्टर का कार्य भी करते हैं।
प्रशांत कहते हैं कि मुंबादेवी माता की कृपा और मां रमण देवी व पिता रविशंकर जायसवाल के आशीर्वाद से आज मेरे पास सब कुछ है। पत्नी रजनी हर सुख और दु:ख में मेरे साथ मजबूती से खड़ी रही। बच्चे पूर्वी जायसवाल और लक्ष्य जायसवाल बड़े स्कूल में अच्छी शिक्षा-दीक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बेटी का सपना डॉक्टर बनने का है तो बेटे का कंप्यूटर सॉफ्टवेयर इंजीनियर।

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