मुख्यपृष्ठस्तंभमेहनतकश: मुश्किलों को मात देकर अजय ने हासिल की `विजय'

मेहनतकश: मुश्किलों को मात देकर अजय ने हासिल की `विजय’

आनंद श्रीवास्तव

कहते हैं कि वही इंसान दूसरों के दुख और दर्द को समझ सकता है, जिसने कभी उस दर्द को महसूस किया होता है। व्यक्ति अपने दर्द से, अपनी तकलीफों से बहुत कुछ सीख लेता है। जिंदगी व्यक्ति को बहुत कुछ सिखा देती है। अजय सूर्यवंशी की भी कुछ ऐसी ही कहानी है। उनको रिमांड होम से लेकर फिल्म मेकर तक का सफर बेहद मुश्किलों भरा रहा है लेकिन जीवन की हरएक चुनौतीयों को मात देते हुए अजय ने `विजय’ यानी जीत हासिल करते हुए एक मुकाम हासिल किया। अजय की विजय की दास्तां कई लोगों को प्रेरणा दे रही है। जिसने बचपन में ही अपने माता-पिता को खो दिया हो उस बच्चे पर क्या बीती होगी, यह दर्द वो खुद ही जान सकता है।
`लोग कहते हैं कि जब मैं जब लगभग छह-आठ महीने का था, तब मेरे मां-बाप मुझे मेरे दादाजी के घर में छोड़ कर पता नहीं कहां चले गए, उसके बाद मेरे दादाजी की क्या मजबूरी थी यह मैं नहीं जानता, लेकिन वह मुझे एक अस्पताल के बाहर छोड़कर चले गए, मेरे हाथ पर मेरा नाम लिखा था, अजय सूर्यवंशी।’
बस अपनी इतनी-सी पहचान बता पानेवाले अजय सूर्यवंशी का बचपन रिमांड होम में बीता। जवानी इधर-उधर की नौकरी कर अपना रहने-खाने का जुगाड़ करने और पढ़ाई करने में बीता। लेकिन आज अजय सूर्यवंशी एक मुकाम पर पहुंच चुके हैं, जहां लोग उनसे मिलने आते हैं, अपॉइंटमेंट लेकर और फिर मुलाकात कर चले जाते हैं। जी हां, कभी सड़क छाप की तरह रहने को मजबूर अजय आज एक फिल्म रायटर, डायरेक्टर बन चुके हैं। अपने दुख-दर्द भरे जीवन को वह भूले नहीं हैं। शायद इसीलिए अजय सूर्यवंशी ने अनाथ बच्चों पर आधारित फिल्म `ब्लैक होम’ का निर्माण किया। यह फिल्म सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। अजय सूर्यवंशी इन दिनों एक म्यूजिक एल्बम और फिल्म पर काम कर रहे हैं। इन सभी में उन्होंने कलाकार के तौर पर  रिमांड होम के बच्चों को ही काम करने का मौका दिया है।
अजय सूर्यवंशी ने हाल ही के दिनों में लातूर जाकर अपनी पुरानी जिंदगी को खंगालने की कोशिश की और पहुंच गए अपने मूल गांव लातूर। अजय सूर्यवंशी को लातूर का यह पता उस रिमांड होम से मिला, जहां उन्हें बचपन में पहली बार लाकर रखा गया था। लेकिन वहां पहुंचने के बाद अजय को बैरंग लौटना बड़ा, उस पते पर कोई भी नहीं था। इसके बाद अब अजय सूर्यवंशी ने अपना लक्ष्य इन बच्चों की सेवा करना तय किया है ताकि उन जैसे बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो।

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