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मेहनतकश : सपने पूरे होते हैं

आनंद श्रीवास्तव

मायानगरी मुंबई यहां आनेवाले सभी लोगों का स्वागत खुली बांहों से करती है। आंखों में सपने संजोकर मुंबई आनेवाले लोग भी मुंबई को उतना ही प्यार देते हैं, जितना मुंबई उन्हें देती है। यहां हरेक के सपने पूरे होते हैं। हमारे सामने ऐसे कई उदाहरण हैं जहां देखा गया है कि दूर-दराज के राज्यों से आए लोगों ने मुंबई आकर अपने सपनों को पूरा किया है। इसी लिस्ट में निजाकत अली अंसारी का भी एक नाम शामिल है। उत्तर प्रदेश स्थित बरेली के शाहजहांपुर से आए निजाकत अली अपने कुछ सपनों के साथ मुंबई आए थे। यूं तो परेल हिंदमाता के लोग इन्हें `बाबू भाई’ के नाम से जानते हैं। लेकिन इनका असली नाम निजाकत अली अंसारी है। बचपन में पिता का साया सर से उठ जाने के बाद महज तेरह साल की उम्र में निजाकत अली नौकरी की तलाश में मुंबई आए थे। ऐसे में अपना जीवन संवारने की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। सो मुंबई आकर उन्होंने अपना भाग्य आजमाने का पैâसला किया। मुंबई आकर वे अपनी मौसी के घर कुर्ला में रहने लगे। यहीं रहते हुए काम-धंधे की तलाश में वो यहां-वहां भटकने लगे। बहुत तलाश करने के बाद उन्हें परेल हिंदमाता के एचपी पेट्रोल पंप पर गाड़ी के टायरों में हवा भरने की नौकरी मिल गई। वहां वे रोजाना गाड़ियों में हवा भरने लगे। जिसके लिए उन्हें एक या दो रुपए मिल जाते थे, जिसे वे खुशी-खुशी स्वीकार कर लेते। हालांकि, अपने इस काम से वे बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं थे। यहां नौकरी करते-करते अंसारी ने मोटर साइकिल रिपेयरिंग का काम सीख लिया और इसी को अपना पेशा बना लिया। धीरे-धीरे निजाकत का काम चर्चित हो गया।
बता दें कि मीठे बोल और हाथों की कला ने उन्हें देखते ही देखते बेहद फेमस कर दिया और निजाकत अब `बाबू भाई मैकेनिक’ के नाम से मशहूर हो गए। पूरे परेल में उनकी चर्चा होने लगी। यहां उनकी दिन दूनी, रात चौगुनी तरक्की होने लगी। कड़ी मेहनत कर उन्होंने मुंबई में अपना खुद का आशियाना बना लिया और मुंबई के वडाला में खुद का एक घर खरीद लिया। आज उनका बेटा उन्हीं के साथ काम में हाथ बंटाता है। वो पढ़ नहीं पाया। लेकिन बाबू भाई की बेटी अक्सा अंसारी पढ़ने में होशियार है। अत: वे उसकी पूरी पढ़ाई करवा रहे हैं। उनका कहना है कि मैं भले ही नहीं पढ़ पाया लेकिन अपनी बेटी को मैं जरूर पढ़ाऊंगा और जैसे मुंबई आकर मैंने अपने सपने को पूरा किया वैसे ही मैं उसके भी सपनों को पूरा करूंगा। इसलिए उन्होंने अपनी बेटी के मन मुताबिक सानपाड़ा के फार्मेसी कॉलेज में एडमिशन करवाया है। वह पढ़कर फार्मासिस्ट बनना चाहती है। अपनी कड़ी मेहनत पर निजाकत का कहना है कि समय कितना भी मुश्किल क्यों न हो अगर जी-तोड़ मेहनत की जाए तो एक न एक दिन सपने जरूर पूरे होते हैं।

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