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मेहनतकश: पिता करते थे खदान में मजदूरी बेटे ने समाज सेवा में हासिल किया मुकाम

अशोक तिवारी

सात टापुओं के शहर मुंबई को स्थापित करने में देश के विभिन्न प्रांतों से आए मजदूरों का महत्वपूर्ण योगदान रहा था। मुंबई से मेहनतकश मजदूरों की वजह से ही कभी टापू के बीच खंडहर सा रहा यह शहर आज देश की आर्थिक राजधानी बन चुका है। मुंबई के साकीनाका क्षेत्र में जंगलेश्वर महादेव मंदिर के आसपास के परिसर में काले पत्थरों की खदान थी। खदान से इन पत्थरों को खोदने का काम मजदूर करते थे। जो मुंबई शहर के विभिन्न क्षेत्रों में इमारत या बाउंड्री वॉल बनाने में उपयोग किया जाता था। इन खदानों में काम करने वाले ज्यादातर मजदूर महाराष्ट्र के दूर-दराज के गांव के रहने वाले थे। इसी कड़ी में महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के अक्कलकोट तालुका के रहने वाले बाबू पवार आज से करीब ५० साल पहले मुंबई शहर में आए थे। रोजी-रोटी के लिए उन्होंने साकीनाका के असल्फा के जंगलेश्वर मंदिर के सामने स्थित काले पत्थर की खदान में मजदूर के तौर पर काम करना शुरू किया। मजदूरी करने के बाद रोजी रोटी के अलावा कुछ पैसे बचे तो बाबू पवार ने असल्फा के बारदान गली में हनुमान जी का एक मंदिर बनवाया। बाबू पवार के चार लड़के थे, जिसमें से दूसरा लड़का सिद्धराम बाबू पवार महाराष्ट्र के यवतमाल जिले से दसवीं तक की पढ़ाई कर मुंबई आया तो उन्होंने हनुमान जी के मंदिर में उसे सेवा करने के लिए लगा दिया। हनुमान मंदिर में सेवा करते-करते सिद्धराम पवार के मन में समाज सेवा की भावना प्रज्वलित हो गई। इसी दौरान वर्ष २००५ में २६ जुलाई की बाढ़ में वह हनुमान मंदिर डूब गया। मंदिर डूबने से दुखी सिद्धराम पवार ने वर्ष २००६ में अपने कुछ युवा साथियों के साथ मिलकर मंदिर का जीर्णोद्वार कराया। जीर्णोद्वार करने के लिए सिद्धू पवार ने जंगलेश्वर बाल मित्र मंडल नामक सामाजिक संगठन का गठन किया, जिसके बाद समाज सेवा की यात्रा अनवरत जारी हो गई। आज जंगलेश्वर बाल मित्र मंडल के माध्यम से सिद्धू पवार बड़े-बड़े धार्मिक आयोजन करते रहते हैं। जिसमें हनुमान जयंती, भंडारा, हल्दी कुमकुम समारोह, प्रवचन, भजन एवं कीर्तन जैसे धार्मिक आयोजन महत्वपूर्ण है। इसके अलावा महिलाओं को साड़ी, कपड़े और बर्तन भी संगठन द्वारा समय-समय पर वितरित किए जाते हैं। सिद्धू पवार ने वडार समाज के होनहार छात्रों को प्रोत्साहन देने के लिए शिव क्रांति फाउंडेशन से हाथ मिलाया और फाउंडेशन के माध्यम से समाज के बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान करवाते हैं। साकीनाका क्षेत्र में सिद्धू पवार एक चर्चित समाजसेवक का नाम हो गया है। सिद्धू पवार का मानना है कि यह सब उन्हें बजरंगबली की प्रेरणा से करने का अवसर प्राप्त होता है और वह आगे भी समाज की इसी तरह सेवा करते रहेंगे।

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