मुख्यपृष्ठस्तंभमेहनतकश : मजदूर से करोड़पति बनने का सफर

मेहनतकश : मजदूर से करोड़पति बनने का सफर

 

अशोक तिवारी

मुंबई शहर के विकास में भारत देश के विभिन्न प्रांतों से आए मजदूरों की मेहनत और उनकी लगन का अच्छा-खासा योगदान है। मुंबई शहर ने भी दरियादिली दिखाते हुए बाहर से आए हुए इन मजदूरों को न सिर्फ सहारा दिया, बल्कि उन्हें जिंदगी में वो मुकाम दिया जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। मुंबई शहर में अच्छे-अच्छे लोगों का भाग्य बदल जाता है। इस शहर में कई अनेक ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे, जहां पर एक आम इंसान कुछ ही दिनों में सेलिब्रिटी बन जाता है और तरक्की की तमाम ऊंचाइयों को हासिल कर लेता है।
कुछ ऐसी ही कहानी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के लालगंज तहसील के मुदहर गांव के रहनेवाले विद्यापति शिव संपत राय की भी है। विद्यापति के पिता शिव संपत राय मुंबई शहर में मिल मजदूर थे। वर्ष १९६७ में विद्यापति राय आजमगढ़ से दसवीं की शिक्षा प्राप्त कर मुंबई शहर में रोजी-रोटी की तलाश में आ गए। विद्यापति के पिता ने उन्हें चांदीवली स्थित निक्सन नामक एक कंपनी में मजदूर के तौर पर भर्ती करवा दिया। विद्यापति राय इस कंपनी में बतौर मजदूर १५ वर्षों तक काम करते रहे। इस दौरान १५ वर्षों में उन्होंने कुछ संपत्ति अर्जित की, जिसकी वजह से उन्होंने खुद की बिल्डिंग मैटेरियल सप्लाई की दुकान खोली। कुछ दिनों में ही दुकान अच्छी-खासी चल निकली। इसके बाद विद्यापति राय के भीतर समाज सेवा करने की भावना जागृत हुई। उन्होंने कांग्रेस पार्टी में वॉर्ड सेक्रेटरी के रूप में काम करना शुरू किया। विद्यापति राय बताते हैं कि जब उन्होंने कांग्रेस ज्वॉइन की तब कांग्रेस की निशानी गाय और बछड़ा थी। ८० के दशक में विद्यापति राय ने साई गणेश मित्र मंडल की स्थापना की। जिसके माध्यम से वह गणेश उत्सव तथा नवरात्रि एवं देवी जागरण जैसे कार्यक्रम भी करवाने लगे। साकीनाका स्थित मानव विकास विद्यालय में बतौर सदस्य काम करनेवाले विद्यापति राय आज कई गरीब छात्रों की फीस अपनी जेब से भरते हैं। उत्तर प्रदेश से आनेवाले नए मजदूरों के रहने, खाने और उन्हें नौकरी दिलाने की व्यवस्था भी विद्यापति राय एक लंबे अरसे से करते आ रहे हैं। विद्यापति राय के दो बेटे हैं, जिन्होंने ग्रेजुएशन करने के बाद व्यवसाय शुरू किया। आज उनके दोनों बेटे रिलायंस कंपनी में टेंडर लेकर ठेकेदारी का बिजनेस करते हैं। साकीनाका जैसे क्षेत्र में दुकान और कई फ्लैट आज विद्यापति राय ने अपने मेहनत और मजदूरी के दम पर बनाया है। इसके अलावा विद्यापति राय विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े हुए हैं। विद्यापति राय का मानना है कि इंसान के भाग्य में जो कुछ भी लिखा है, ईश्वर उसे वो जरूर प्रदान करता है। इसलिए इंसान को सिर्फ अपने कर्म करना चाहिए फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए। समय आने पर परमात्मा शुभ या अशुभ फल कर्ता को प्रदान कर ही देता है।

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