मुख्यपृष्ठनए समाचारमेहनतकश : खुद भटके, पर बच्चों को दिखाई राह 

मेहनतकश : खुद भटके, पर बच्चों को दिखाई राह 

रामदिनेश यादव

हर माता-पिता की ख्वाहिश होती है कि उनके बच्चे उच्चतम पढ़ाई कर अपने जीवन में सफल बनें और अपने माता-पिता का नाम रोशन करें। अपने बच्चों की लाइफ को सिक्योर करने के लिए एक पिता अपनी पूरी ताकत झोंक देता है। खुद भले ही कितने कष्ट सह ले लेकिन अपने बच्चों को सारी सुविधाएं देने का प्रयास करता है। हिंदुस्थान के कोने-कोने से मुंबई में कमाने-खाने के लिए आए लोगों में से एक ओमप्रकाश श्रीवास्तव भी हैं, जो भदोही से यहां पर आकर बस गए हैं। लगभग ५० साल पहले उनके पिता स्व. बाबूलाल श्रीवास्तव मुंबई के सांताक्रुज के खोतवाड़ी में आकर बस गए थे। वे मिल में नौकरी करते थे और यहां की चॉल में अपने छोटे से घर में रहते थे। पिता के देहांत के बाद घर की सारी जिम्मेदारी ओमप्रकाश श्रीवास्तव के कंधों पर आ गई। वह अपनी पढ़ाई छोड़कर एक चॉकलेट कंपनी में सेल्समैन की नौकरी पर लग गए। इसके बाद मसाला की एजेंसी में उन्हें सुपरवाइजर की नौकरी मिल गई, इसी बीच उनकी शादी भी हो गई। पत्नी अनीता ने हाउस वाइफ बनने के बदले जॉब पर जाना पसंद किया, ताकि घर खर्च में अपने पति के बोझ को कम कर सकें। ओमप्रकाश ने नौकरी करते हुए अपनी छोटी बहन और दो भाइयों को पढ़ाया-लिखाया और उनकी शादी की। इसी बीच ओमप्रकाश और अनीता के दो बच्चे हुए। परिवार बढ़ता देख उन्होंने मीरा रोड में किराए का फ्लैट ले लिया। यहीं रहकर उन्होंने ओवर टाइम कर व कड़ी मेहनत करके खुद का फ्लैट खरीद लिया। घर के लोन और बच्चों की पढ़ाई में सारी सैलरी चली जाती थी। तब पैसे बचाने के लिए वो कई किलोमीटर पैदल चलकर अपनी मसाला एजेंसी तक जाते थे। इसी तरह उनकी पत्नी भी अपने ऑफिस तक पैदल ही जाती थीं।
समय बीतता चला गया और ओमप्रकाश श्रीवास्तव के दोनों बच्चे ग्रेजुएट हो गए। बड़े बेटे शिवम ने ग्रेजुएशन के बाद कंप्यूटर इंजीनियरिंग का कोर्स किया और आज बंगलुरु की एक सॉफ्टवेअर कंपनी में कार्यरत हैं तो वहीं छोटे बेटे योगेश ने मरीन इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और एक प्रसिद्ध शिपिंग कंपनी में जॉब कर रहे हैं। ओमप्रकाश और अनीता दोनों अपने बच्चों की उपलब्धियों पर बेहद खुश हैं। दोनों लोग जिंदगी में खुद खूब भटके लेकिन उन्होंने अपने बच्चों को राह दिखा दी। यही वजह है कि आज उनके बच्चे इस काबिल बन गए हैं कि वे अपने पैरों पर खड़े होकर अपने मां-बाप का नाम रोशन कर रहे हैं।

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