मुख्यपृष्ठस्तंभमेहनतकश : बीसी में गंवाया मेहनत कर बनाया

मेहनतकश : बीसी में गंवाया मेहनत कर बनाया

अनिल मिश्र

हर किसी के जीवन में उतार-चढ़ाव तो लगा ही रहता है और सम्मानजनक स्थान पाने के लिए व्यक्ति को जीवन में संघर्ष करना ही पड़ता है। उल्हासनगर के राजेश गिरधर भाटिया के साथ भी जीवन में कुछ ऐसा घटित हुआ। बीसी के चक्कर में बर्बाद होनेवाले राजेश भाटिया ने अपनी कड़ी मेहनत से आखिरकार अपने जीवन को आबाद कर ही लिया।
राजेश बताते हैं कि बात १९६६ की है जब राजेश के पिता गिरधर व चाचा लालचंद उल्हासनगर-३ स्थित ग्लैमर होटल की बगल में गोदरेज की एजेंसी लेकर उसे चलाते थे। अंबरनाथ स्टेशन रोड पर दो दुकानें और उल्हासनगर-३, ओटी सेक्शन में फ्लैट था। पिता गिरधर बीसी भी चलाते थे। बीसी में सन १९८२-१९८३ के दौरान तकरीबन ५० लाख रुपए का घाटा हो गया। लोगों को दुकान और मकान बेचकर बीसी का पैसा चुकता करने के बाद ऐसे लगा मानो आसमान से जमीन पर गिर पड़ा। २९ साल तक भाड़े के मकान में रहनेवाले राजेश ने न्यू ईरा से हाई स्कूल तथा बारहवीं आरकेटी महाविद्यालय से पढ़ाई की। घर की परिस्थिति खराब होने के कारण तीन साल तक चंद्रपुर में रोड और नाली बनाने का काम किया। उसके बाद १९९४ में राजेश फोटो स्टूडियो संभालने लगे। पिता और चाचा के साथ रहकर राजेश फोटो खींचना सीख गए थे। बाद में कंप्यूटर से दुकान में ही फोटो बनाने लगे। शादी व अन्य पर्वों का ऑर्डर लेकर दिन-रात मेहनत कर अंबरनाथ स्थित सर्वोदय नगर में अपना खुद का घर खरीदा। घर खरीदने में पत्नी का बड़ा योगदान रहा। घर खरीदते समय पत्नी ने बिना सोचे-समझे अपने आभूषण दे दिए। दो चाचा की लड़कियों सहित परिवार में १५ लड़कियां हैं। दोनों चाचा को एक-एक लड़के थे, जिनकी २००२ में कल्याण की खाड़ी में गणपति विसर्जन के समय गहरे पानी में डूबने से मौत हो गई। दो भाइयो की मौत के चलते उन्हें एक बड़ा झटका लगा। आज १५ बहनों के अकेले भाई राजेश हैं। शादी-ब्याह सहित घर के सभी कार्यों में उनकी प्रमुख भूमिका रहती है। राजेश को एक बेटा और एक बेटी हैं, जो सादगी भरा जीवन व्यतीत करते हैं। पिता सहित चाचा की भी देखरेख करनी पड़ती है। राजेश की बेटी बीएएमएस कर रही है और बेटा पढ़ रहा है। नोट बंदी और कोरोना महामारी के दौरान स्थिति लड़खड़ा गई थी क्योंकि कोरोना काल में राजेश कोविड की चपेट में आ गए थे। इस संकट की घड़ी में उनके बचपन के चार दोस्त ढाल की तरह उनके साथ खड़े रहे। जरूरतमंदों की सहायता करनेवाले राजेश अपनी कड़ी मेहनत के चलते आज दोबारा सम्मानजनक स्थिति में आ रहे हैं।

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