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हरियाली तीज कल : व्रत से शिव होंगे प्रसन्न … सुहागिनों के अमर होंगे सुहाग!

  • बन रहा है रवि योग का शुभ संयोग

अपने पति की दीर्घायु के लिए औरतें हरियाली तीज का व्रत रखती हैं। सावन महीने के शुक्लपक्ष की तृतीया को मनाया जानेवाला यह त्योहार इस बार ३१ जुलाई यानी कल मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखने के साथ ही सोलह शृंगार कर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं। उनके पूजन से प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ सुहागिनों को अखंड सुहागिन होने का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इस बार हरियाली तीज का व्रत काफी खास है क्योंकि ज्योतिषविद् के अनुसार इस बार रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने १०८ जन्म लिए थे। १०८वें जन्म में माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ था। इसी कारण महिलाएं और लड़कियां हरियाली तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। व्रत रखनेवालों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
लड़कियां भी रखती हैं व्रत
महिलाएं हरियाली तीज का व्रत अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं और भगवान से सुखद दाम्पत्य जीवन की कामना करती हैं। लड़कियां भी भगवान शिव जैसा पति प्राप्त करने के लिए यह व्रत रखती हैं। व्रत में लड़कियां और औरतें हरे रंग के कपड़े और चूड़ियां पहनती हैं। वे हाथों में मेहंदी रचाती हैं।
क्या होता है सिंजारा (सिंधारा)
सिंजारा यानी सिंधारा हरियाली तीज से एक-दो दिन पहले आता है। इसमें मायके से कपड़े, आभूषण, शृंगार का सामान और खाने-पीने की वस्तुएं शामिल होती हैं। मान्यता है कि मायके से आनेवाले सिंजारे के जरिए मायके से बेटी के लिए शुभकामनाएं भेजी जाती हैं। बता दें कि जिन लड़कियों का रिश्ता तय हो जाता है उनके लिए भी हरियाली तीज का विशेष महत्व होता है। उनके लिए ससुराल से सुहाग का सामान भेजा जाता है, जिसमें कपड़े, मेंहदी, शृंगार और मिठाई शामिल होती है।
शुभ मुहूर्त
तृतीया तिथि प्रारंभ – ३१ जुलाई, २०२२ को ०२:५९ बजे, सुबह
तृतीया तिथि समाप्त – १ अगस्त, २०२२ को ०४:१८ बजे सुबह
-पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह ६ बजकर ३० मिनट पर शुरू होकर ८ बजकर ३३ मिनट तक है।
-प्रदोष पूजा सायंकाल में ६:३३ बजे से रात ८:५१ बजे तक की जा सकती है।
पूजा विधि
हरियाली तीज के दिन सुबह स्नान करके नए कपड़े पहनकर पूजा का संकल्प लें। पूजा स्थल की साफ-सफाई करने के बाद मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति बनाएं और उन्हें लाल कपड़े के आसन पर बिठाएं। पूजा की थाली में सुहाग की सभी चीजों को रखें और उन्हें भगवान शिव और माता पार्वती को अर्पित करें। अंत में तीज कथा और आरती करें।

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