मुख्यपृष्ठटॉप समाचारसुख भरे दिन बीते रे... ‘डीजल’ में लगी आग!

सुख भरे दिन बीते रे… ‘डीजल’ में लगी आग!

•  थोक ग्राहकों के लिए महंगा हुआ रु. २५ लीटर
• आम लोग भी होंगे प्रभावित

सामना संवाददाता / मुंबई । यूपी सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के कारण पिछले करीब पांच महीनों से पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर थीं। करीब महीने भर से चल रहे यूक्रेन-रूस के बीच के तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई। इसके बावजूद हिंदुस्थान में तेल की कीमतें अप्रभावित रहीं। नतीजतन लोग काफी राहत महसूस कर रहे थे, लेकिन अब ये सुख भरे दिन बीत गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा, उसकी सोशल मीडिया सेल और समर्थक यही दिखाने का प्रयास कर रहे थें कि चाहे कुछ भी हो जाए मोदी सरकार र्इंधन की कीमतों में वृद्धि नहीं होने देगी। परंतु लोगों का ये भ्रम टूट गया है। तेल कंपनियों ने कल डीजल की कीमतों में एकमुश्त २५ रुपए प्रति लीटर की वृद्धि करके लोगों को जोरदार झटका दिया है। हालांकि ये वृद्धि थोक ग्राहकों के लिए किए जाने का दावा किया जा रहा है लेकिन इसकी गाज सामान्य लोगों पर भी गिरनी तय ही है।
बता दें कि ऑयल मार्वेâटिंग कंपनियों ने बल्क कस्टमर्स के लिए डीजल के दाम में प्रति लीटर २५ रुपए की बढ़ोत्तरी की है। इससे मुंबई में थोक उपभोक्ताओं के लिए डीजल का दाम बढ़कर १२२.०५ रुपए प्रति लीटर हो गया है। पेट्रोल पंपों पर डीजल ९४.१४ रुपए प्रति लीटर के भाव बिक रहा है। थोक में पेट्रोल, डीजल खरीदने वाले बल्क कस्टमर्स रक्षा क्षेत्र के प्रतिष्ठान, रेलवे और विभिन्न ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन, पावर प्लांट, सीमेंट प्लांट, केमिकल प्लांट के अलावा अन्य इंडस्ट्रीयल प्लांट, एयरपोर्ट्स, मॉल और अन्य इंडस्ट्रीयल प्रतिष्ठानों के शामिल होने से सामान्य जनता को भी इस मूल्यवृद्धि का खामियाजा महंगाई में वृद्धि के रूप में भुगतना पड़ेगा। इस मूल्यवृद्धि के कारण बस बेड़े के परिचालकों और मॉल जैसे थोक उपभोक्ता पेट्रोल पंपों से र्इंधन खरीदने को मजबूर हो गए हैं। आमतौर पर वे पेट्रोलियम कंपनियों से सीधे र्इंधन खरीदते हैं, लेकिन थोक उपभोक्ताओं के लिए दरों और पेट्रोल पंप कीमतों में २५ रुपए के बड़े अंतर की वजह से अब थोक उपभोक्ता भी पेट्रोलियम कंपनियों से सीधे टैंकर बुक करने के बजाय पेट्रोल पंपों से र्इंधन खरीद रहे हैं। इससे सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों और रिटेलरों का नुकसान और बढ़ रहा है। गौरतलब हो कि सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों ने चार नवंबर, २०२१ से पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं।

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