कमजोर पर कहर!

 

मामा बन गए ‘बुलडोजर जस्टिस’ के ब्रांड एबेंसडर

त्वरित न्याय के काम पर एमपी में शिवराज सरकार ने गरीबों पर खासा कहर ढाया है। किसी अपराध में किसी शख्स का नाम आया नहीं कि फौरन उसका घर ढहा दिया जाता है। इस बारे में ‘द वायर’ ने एक सर्वे किया तो पाया कि ५० मामलों में बुलडोजर के शिकार सभी परिवार गरीब थे। हां, यह जरूर है कि बुलडोजर ने घर तोड़ते वक्त धर्म नहीं देखा। हिंदू और मुसलमानों दोनों के घर तोड़ डाले।

‘हम कई पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं। करीब ६० साल हो गए। मकान की रजिस्ट्री भी है, नगर निगम में भरे हाउस टैक्स की रसीदें भी हैं और कुछ वर्ष पहले जो इस मकान में निर्माण कराया था, नगर निगम से ली गई उसकी अनुमति के कागजात भी हैं, लेकिन पुलिस और प्रशासन के लोग उस दिन कुछ भी देखने तैयार नहीं थे। बस आए और घर पर बुलडोजर चला दिया’ यह शब्द मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के माधौगंज थानाक्षेत्र में रहने वाले सुनील रावत के हैं। उनके १८ वर्षीय बेटे सुमित रावत को बीते जुलाई माह में एक छात्रा की हत्या के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वारदात १० जुलाई को हुई, १३ जुलाई को सुमित पकड़ा गया और अगली ही सुबह स्थानीय पुलिस और प्रशासन के अधिकारी बुलडोजर के साथ सुमित के घर के बाहर खड़े थे।

सुनील की पत्नी क्रांति कहती हैं, ‘बेटे ने गलती की है, उसे सजा दो, लेकिन पुलिस और प्रशासन के अधिकारी आकर कहते हैं कि तुमने अपने बेटे को क्या सिखाया!’ सुनील के जिस मकान को अवैध निर्माण बताकर पुलिस और प्रशासन ने आनन-फानन में ढहा दिया, उसी मकान को गिरवी रखकर इस कार्रवाई से करीब छह महीने पहले ही उन्होंने बैंक से ५ लाख रुपए का लोन भी लिया था। जब मकान को तोड़े जाने की भनक लोन जारी करने वाले ‘लक्ष्मीबाई महिला नागरिक सहकारी बैंक मर्यादित (ग्वालियर)’ को लगी तो उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार, जिला कलेक्टर (ग्वालियर), पुलिस अधीक्षक (ग्वालियर) और नगर निगम (ग्वालियर) के खिलाफ ग्वालियर हाई कोर्ट में याचिका लगा दी, जिसमें इस कार्रवाई को अवैध और मनमाना बताते हुए चारों प्रतिवादियों से ऋण की राशि वसूल किए जाने की मांग की गई है। मकान का मालिकाना हक ७५ वर्षीय कमल सिंह के पास है। क्रांति कहती हैं, ‘हमें तो बिना कुछ किए ही सजा देकर बेघर कर दिया। यह सिर्फ एक बानगी है, उन कार्रवाइयों की जो मध्य प्रदेश की सत्ता में वर्ष २०२० में हुए तख्तापलट के बाद बनी भाजपा की सरकार में शुरू हुईं। विधि विरुद्ध की गईं ऐसी कार्रवाइयों को राज्य सरकार और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का समर्थन प्राप्त था। वह इस ‘बुलडोजर जस्टिस’ के ब्रांड एबेंसडर बने और खुले मंच से सार्वजनिक तौर पर कई बार इसका महिमामंडन भी किया।

प्रधानमंत्री आवास योजना में बने घर को भी ढहाया

अप्रैल २०२२ में खरगोन में रामनवमी के जुलूस पर हुए पथराव के बाद १६ मकान और २९ दुकानों पर बुलडोजर चला दिया गया था, इनमें हसीना खान का ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत बना मकान भी शामिल था। इसी तरह, अप्रैल २०२२ में राजगढ़ में भी पीएम आवास योजना के तहत बने अजीज खां और रेहाना खां के मकान को तोड़ दिया गया था क्योंकि उनका बेटा सलमान बलात्कार के एक मामले में फरार था। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री तक से की गई थी। मां रेहाना के मुताबिक, तोड़ा गया मकान सलमान के नाम नहीं बल्कि उनके ससुर गफूर खां के नाम था। ज्योति सुर्वे की ही बात करें तो वह कुछ समय पहले तक ४,००० रुपए मासिक में एक स्कूल में साफ-सफाई का काम करती थीं। इनके अलावा जिन आरोपियों के मकान तोड़े गए, उनमें कोई पतंग का चीनी मांझा बेचने, कोई स्मैक की पुड़िया बेचने, तो कोई मजदूरी करने का काम करता था। एक तरफ आर्थिक असमर्थता, ऊपर से आरोपी की आपराधिक पृष्ठभूमि के चलते इन लोगों के परिजन बुलडोजर कार्रवाई को चुनौती ही नहीं दे सके।

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