मुख्यपृष्ठग्लैमरउनमें कई क्षमताएं मौजूद हैं!-अजय देवगन

उनमें कई क्षमताएं मौजूद हैं!-अजय देवगन

बॉलीवुड के कुछ स्टार्स ऐसे हैं, जिनकी उम्र जैसे-जैसे बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे वो अधिक व्यस्त होते जा रहे हैं। इस फेहरिस्त में अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार और अजय देवगन जैसे कलाकार शामिल हैं। ५३ वर्षीय अजय देवगन इस समय बॉलीवुड में शिखर के हीरो माने जाते हैं और अभिनय के साथ फिल्म निर्माण, ओटीटी में भी वे कमाल का काम करते नजर आ रहे हैं। फिल्म ‘रनवे-३४’ में कैप्टन बत्रा का किरदार निभानेवाले अजय देवगन ने इस फिल्म का निर्माण और निर्देशन किया है। पेश है, अजय देवगन से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

आपकी इस नई फिल्म ‘रनवे-३४’ में क्या अलग है?
मुझे सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्में पसंद हैं। ‘रनवे-३४’ भी सच्ची हकीकत पर आधारित है। यह घटना जेट एयरवेज की दोहा से कोच्चि फ्लाइट में हुआ। बोइंग ७३७-८०० एयरक्राफ्ट के कॉकपिट में क्या हादसा हुआ यह एक रहस्य है और यह स्क्रीन पर देखना एक रोमांचक अनुभव है। वैसे मेरे अपने निर्माण की फिल्म ‘शिवाय’ एक यादगार फिल्म है लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।

कोलकाता में शूटिंग करना कितना अलग और कितना खास रहा?
कोलकाता में बहुत कम फिल्मों के लिए मैंने शूटिंग की है। जिन लोगों को लजीज नॉन वेज फूड पसंद हैं, उनके लिए कोलकाता बढ़िया जगह है। मैं भी खाने का शौक रखता हूं। शूटिंग के समय मेरा वजन भी बढ़ गया था।

‘रनवे-३४’ के लिए अमिताभ बच्चन को निर्देशित करने का अनुभव कैसा रहा?
यह अनुभव मुझे एक व्यक्ति, कलाकार और बतौर निर्देशक बेहद चैलेंजिंग महसूस हुआ। उन्होंने क्या महसूस किया इसे जानने के लिए मैं खुद भी उत्साहित हूं। अमित अंकल इस सदी के ऐसे महानायक हैं, जो निर्देशकों को प्रेरणा देते हैं। एक संवाद को कई तरीकों से बोलने के साथ ही उनमें कई क्षमताएं मौजूद हैं। उनको निर्देशित करना यानी एक साथ उत्तेजना और प्रेशर महसूस करने जैसा ही है।

एक्टिंग करना मुश्किल है या डायरेक्शन करना?
अभिनय और निर्देशन एक सिक्के के दो पहलू हैं। मैं जब एक्टिंग करता हूं, तो अपने हिस्से का काम ठीक ही करता हूं। लेकिन निर्देशन करने के लिए थोड़ा और सोचना पड़ता है। डायरेक्शन के लिए एक्टिंग बैकसीट लेती है। दोनों को समतोल करना ही पड़ता है।

आपने इंडस्ट्री में ३० वर्षों से अधिक समय तक काम किया है। आपके लिए सफलता का मंत्र क्या है?
मुझे लगता है कि यह सवाल अमित अंकल को पूछना सही होगा। उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में काम करते हुए ५३ वर्ष हो गए हैं। मेरे पिताजी ने ५० वर्ष से अधिक समय तक काम किया। अभी आगे बहुत काम करना है। इतनी जल्दी अपने काम का जायजा क्यों लिया जाए?

आपके लिए कैसे संभव होता है फिल्म निर्माण और निर्देशन के साथ ही ओटीटी पर काम करना?
मेरे साथ कई और लोग भी जुड़े हुए हैं। सभी मेरे साथी हैं। कोई भी इंसान अगर एक साथ कई प्रोजेक्टों में जुड़ा है, तो यकीन मानिए कि उसके साथ कई और लोग भी जुड़े हैं।

पिछले कुछ दिनों से पान मसाला जैसे ब्रांड को एंडोर्स करनेवाले स्टार ट्रोल हो रहे हैं। आपने भी विमल पान मसाला को एंडोर्स किया था?
यह एक व्यक्तिगत मसला है। मेरी राय में मैंने विमल मसाला के विज्ञापन को इसीलिए एंडोर्स किया चूंकि इसमें सिर्फ इलायची का स्वाद है, जो एक माउथ प्रâेशनर की तरह है। अगर इसमें कुछ और गलत हानिकारक पदार्थ शामिल है, तो इसे बेचा ही क्यों जाता है?

आपने ‘रुद्र’ के जरिए ओटीटी पर भी डेब्यू किया है। कितना अलग है यह माध्यम फिल्मों से?
मुझे ओटीटी और फिल्मों में कोई फर्क नहीं महसूस हुआ। शूटिंग का प्रोसेस एक जैसा ही है।

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