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हेडफोन बना हेडेक! … नागरिकों में बहरेपन की आ रही शिकायत

•  कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के हो रहे शिकार
योगेंद्र सिंह ठाकुर / पालघर
हम चाहे मूवी देखना चाहते हैं या मोबाइल पर गाना सुनना चाहते हैं, उसके लिए हम सभी ईयरफोन या हेडफोन का इस्तेमाल करते हैं। ईयरफोन आज के समय में हमारी लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा बनने के साथ ही हेडेक बन गया है। इन ईयरफोन के ज्यादा इस्तेमाल की वजह से नागरिकों में बहरेपन की शिकायत सामने आ रही है। साथ ही दिल की बीमारी, वैंâसर जैसी गंभीर बीमारियों के भी लोग शिकार हो रहे हैं। डॉ. जितेंद्र बोहरा के अनुसार, कान से संबंधित महीने में करीब दस से पंद्रह मरीज ग्रामीण क्षेत्रों सामने आ रहे है। शहरी क्षेत्रों में मरीजों के आंकड़े कहीं ज्यादा हैं।
ब्लूटूथ से युवा वर्ग कान की बीमारियों के संक्रमण का ज्यादा शिकार हो रहे हैं।
दरअसल, ईयरफोन या हेडफोन से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें दिमाग को प्रभावित करती हैं। यही नहीं ईयर फोन को तेज आवाज में सुनने से कानों के अंदर सेल्स खत्म होने का भी खतरा रहता है। इससे न केवल सुनने की क्षमता पर असर पड़ता है, बल्कि दिल की समस्या भी हो सकती है। इससे हृदय गति तेज हो जाती हैै। अगर किसी दूसरे व्यक्ति के कानों में संक्रमण है और आप भी वही हेडफोन या ईयरफोन का इस्तेमाल करते हैं तो आपको भी संक्रमण का खतरा हो सकता है, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकता है।
निकालने के बाद भी आवाज आने का एहसास
डॉ. महेश मेवाड़ा का कहना है कि अब ज्यादा केस ऐसे आ रहे हैं, जिसमें लोग लंबे समय तक फोन या हेडफोन का इस्तेमाल करते हैं। इससे कानों में दर्द, चक्कर आना और कान से हेडफोन निकालने के बाद भी आवाजें आने जैसी परेशानियां शुरू हो जाती हैं। इतना ही नहीं कई लोगों की धीरे-धीरे सुनने की क्षमता भी कम हो रही है। एक मरीज की मां ममता कहती हैं कि कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू होने के बाद उनके बच्चे ने उन्हें कान से कम सुनाई देने और दर्द की शिकायत की, जिसके बाद डॉक्टर से जांच करवाकर लंबे समय तक इलाज करवाना पड़ा।

महीने में ५० से ६० कान से जुड़ी बीमारियों के मरीज आ रहे है। हालांकि, पुख्ता तौर पर ये नहीं कहा जा सकता कि इनमें हेडफोन की वजह से कितने लोगों को समस्याएं आई हैं। वैसे लोगों को ऐसे उपकरणों को सीमित समय तक ही प्रयोग करना चाहिए।
-दीप्ति गायकवाड़, ईएनटी सर्जन,
पालघर ग्रामीण अस्पताल

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