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लॉकडाउन के बाद हेल्थडाउन! स्टडी में सामने आया खौफनाक सच; ७० फीसदी बेटियां जी रहीं टेंशन में

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
कोरोनाकाल में लोग जहां लॉकडाउड से परेशान थे, वहीं अब लोगों का हेल्थडाउन चल रहा है। हेल्थडाउन की इस पीड़ा से देश की लाखों बेटियों पीड़ित हैं। यूनाइटेड नेशंस की सेक्सुअल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ एजेंसी ‘यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड’ की ओर से १४ से १९ साल की किशोरियों-युवतियों को लेकर स्टडी की गई। इसमें डरानेवाली सच्चाई सामने आई। शादीशुदा युवतियों ने माना है कि हार्मोनल इम्बैलेंस के चलते उनका सेक्स टाइम घट-बढ़ गया। महिलाओं में हेल्थ संबंधी समस्याएं इतनी बढ़ गईं कि अब उन्हें लंबे समय तक परेशानी भुगतनी पड़ेगी। ‘यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड’ ने इस साल फरवरी में सर्वे किया था, जिसकी रिपोर्ट मई में जारी की गई। स्टडी के लिए सैंपल साइज में शामिल ३४९ लड़कियों के अलावा ग्रुप कम्युनिटी डिस्कशन्स और दूसरे तरीके भी यूज किए गए।
पुलिस तक भी
नहीं पहुंच पाईं  पीड़िताएं
रिपोर्ट के अनुसार कोरोना के बाद बिगड़े हालात की वजह से ५२ फीसदी लड़कियों ने अपने साथ लैंगिक हिंसा की बात स्वीकारी। वो घरेलू हिंसा से लेकर फिजिकल हिंसा, यौन उत्पीड़न, दुव्र्यवहार और उपेक्षा की शिकार बनीं। लॉकडाउन में पुलिस तक नहीं जा पाने से महिलाओं व लड़कियों के साथ हुई हिंसा के मामलों की अधिकतर रिपोट्‌र्स रिकॉर्ड ही नहीं हुर्इं। नतीजतन उन्हें न्याय भी नहीं मिला।
७० फीसदी हो गई हैं तनाव की शिकार
स्टडी रिपोर्ट के अनुसार सरकारी टीचर, मेडिकल ऑफिसर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स, स्कूल  मैनेजमेंट कमेटी मेंबर्स और पंचायत राज प्रतिनिधियों से हुई बातचीत में सामने आया कि कोरोना के चलते राजस्थान की युवतियों-महिलाओं की मेंटल हेल्थ पर गहरा प्रभाव पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार पहले से ही परेशानी झेल रहीं कई लड़कियों में अब हार्मोनल असंतुलन भी बढ़ गया। लॉकडाउन के बाद से करीब ७० फीसदी लड़कियां टेंशन में जी रही हैं। इसी डर और तनाव के कारण उनमें ये समस्याएं हुईं ।

 

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