मुख्यपृष्ठनए समाचारसुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद-३७० पर सुनवाई शुरू:  उमर, महबूबा को है उम्मीद!

सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद-३७० पर सुनवाई शुरू:  उमर, महबूबा को है उम्मीद!

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर, महबूबा को संविधान की सर्वोच्चता पर विश्वास
दीपक शर्मा / जम्मू
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अनुच्छेद ३७० को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अब उन्हें `न्याय मिलने’ की उम्मीद है। उनके अलावा पीडीपी अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट देश में एकमात्र ऐसी संस्था बची है, जो यह सुनिश्चित कर सकती है कि भारत अपने संविधान के अनुसार शासित हो। उमर अब्दुल्ला ने कहा, `हम यहां जम्मू-कश्मीर के लोगों की ओर से इस उम्मीद के साथ आए हैं कि हम यह साबित कर सकते हैं कि ५ अगस्त २०१९ को जो हुआ, वह असंवैधानिक और अवैध था।’
उधर श्रीनगर स्थित पीडीपी कार्यालय में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अनुच्छेद ३७० पर सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर पूरी दुनिया की नजर है। जम्मू-कश्मीर ने मुस्लिम बहुल राज्य होने के बावजूद धर्म के आधार पर दो राष्ट्र सिद्धांत को खारिज कर भारत के साथ हाथ मिलाया। हमें संविधान के तहत आश्वासन दिया गया था। ये गारंटी चीन, पाकिस्तान या किसी पड़ोसी देश द्वारा नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा, `सर्वोच्च न्यायालय को यह देखना होगा कि देश में संस्थानों को वैâसे नष्ट कर दिया गया है और शीर्ष न्यायालय ही एकमात्र संस्था है, जो संविधान को बचा सकती है। भाजपा न केवल संसद में अपने प्रचंड बहुमत के आधार पर संविधान के साथ खिलवाड़ कर रही है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के पैâसलों सहित हर चीज की अनदेखी कर रही है। वे दिल्ली पर सुप्रीम कोर्ट के पैâसले के बाद एक अध्यादेश लाए जो असंवैधानिक है।’ अनुच्छेद ३७० याचिकाओं पर पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि शीर्ष अदालत को संविधान और भाजपा के एजेंडे के बीच पैâसला करना है।
बता दें कि पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने बुधवार को भारतीय संविधान में एक प्रावधान अनुच्छेद ३७० जो पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देता था को निरस्त करने के केंद्र के पैâसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की है। चार साल के अंतराल के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ सोमवार और शुक्रवार को छोड़कर दिन-प्रतिदिन के आधार पर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। संविधान पीठ के अन्य न्यायाधीशों में शामिल न्यायमूर्ति एसके कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने सुविधाजनक संकलन तैयार करने और उन्हें २७ जुलाई तक जमा करने के लिए याचिकाकर्ता और सरकार दोनों पक्षों से दो वकीलों को नियुक्त किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस तारीख के बाद कोई भी दस्तावेज स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब तक वकीलों, कार्यकर्ताओं, राजनेताओं और सेवानिवृत्त सिविल सेवकों द्वारा लगभग २३ याचिकाएं दायर की गई हैं। उसमें सुप्रीम कोर्ट से जम्मू-कश्मीर के लोगों की सहमति के बिना अनुच्छेद ३७० को रद्द करने और इसके दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजन की संसद की वैधता और संवैधानिकता की जांच करने का आग्रह किया गया था।

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