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दिल अभी भरा नहीं है : बेचने के लिए बनाओ नई संपत्तियों की लिस्ट!

केंद्र सरकार ने दिया विभिन्न मंत्रालयों को आदेश
सामना संवाददाता / मुंबई
केंद्र की मोदी सरकार एक- एक कर सभी सरकारी उपक्रमों को बेचती जा रही है। उसे इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन-सी कंपनी का किस तरह का परफॉर्मेंस है। हाल ही में ‘दोपहर का सामना’ ने बताया था कि मोदी सरकार ओएनजीसी, एलआईसी के साथ-साथ आईडीबीआई बैंक, कॉनकोर, शिपिंग कॉरपोरेशन, हिंदुस्थान जिंक और एचजेएल को बेचने का ब्लू प्रिंट बना चुकी है। अब खबर ये है कि मोदी सरकार का दिल अभी भी भरा नहीं है और उसने विभिन्न मंत्रालयों को आदेश दिया है कि वे अपने अधीन ऐसी संपत्तियों की सूची बनाएं, जिसे बेचा जा सके।
बता दें कि मोदी सरकार ने सरकारी उपक्रमों (कंपनियों) को बेचकर पैसा जुटाने का प्लान बना रखा है। इन पैसों से वह अपने बजट घाटे को पूरा करने के लक्ष्य पर चल रही है। ध्यान देनेवाली बात है कि इस साल सरकार संपत्ति बेचकर बजट टारगेट से कम राजस्व जुटा पाई है। इसके चलते सरकार ने सभी मंत्रालयों और इसके विभागों को नई संपत्तियों की पहचान करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार जुटाई गई संपत्तियों को जल्द बेचकर आर्थिक मंदी से निपटना चाहती है। एक प्रमुख आर्थिक अखबार की रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार जुटाई गई संपत्तियों को बेचकर पहले ७ महीनों में सिर्फ ३३,४४३ करोड़ रुपए का राजस्व जुटा पाई है, जबकि सरकार का लक्ष्य मार्च में खत्म हो रहे इस वित्त वर्ष के अंत तक १.६ लाख करोड़ रुपए राजस्व जुटाने का था। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार इस वित्त वर्ष में संपत्तियों को बेचकर अधिकतम १.२४ लाख करोड़ रुपए का राजस्व ही जुटा सकती है।
मामले के जानकारों के अनुसार सरकार के कई मंत्रालय ऐसे हैं, जो लक्ष्य ​को हासिल करने में असफल रहे हैं। सरकार ने उन्हें अतिरिक्त संपत्तियों की पहचान करने या उसके बदले में कोई अन्य संपत्ति खोजने का निर्देश दिया है, ताकि मुद्रीकरण प्रक्रिया को तेजी से बढ़ाया जा सके। सरकार मंत्रालयों को उनका लक्ष्य हासिल करने में सहायता भी कर सकती है।
बीएसएनएल का बिकेगा टावर
दूरसंचार, रेलवे और पेट्रोलियम मंत्रालय ने अगले वित्तीय वर्ष तक संपत्ति मुद्रीकरण प्रक्रिया को टालने का निर्णय लिया है। दूरसंचार मंत्रालय को २०,१८० करोड़ रुपए का लक्ष्य दिया गया था, जबकि यह अभी तक बेचने के लिए सिर्फ ४,७०० करोड़ रुपए की संपत्ति की पहचान कर पाई है। दूरसंचार मंत्रालय द्वारा संपत्ति मुद्रीकरण के लिए पहचानी गई संपत्तियों में बीएसएनएल के टावर भी शामिल हैं। मुद्रीकरण के लिए यह बोली इस वित्तीय वर्ष में शुरू होने की उम्मीद है लेकिन राजस्व केवल अगले वित्तीय वर्ष के दौरान आएगा।

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