मुख्यपृष्ठसमाचारबिहार में  कैसे आएगी खुशहाली?... बजट पर भारी `बदहाली'!

बिहार में  कैसे आएगी खुशहाली?… बजट पर भारी `बदहाली’!

सामना संवाददाता / पटना । शिक्षा व्यवस्था किसी राज्य का आईना होती है लेकिन बिहार की राजधानी पटना में शिक्षा की तस्वीर धूमिल है। सरकार हर साल शिक्षा पर पानी की तरह पैसा बहा रही है। व्यवस्था फिर भी नहीं सुधर रही है। वर्ष २०२२-२३ में शिक्षा का बजट ३९ हजार १९२ करोड़ कर दिया गया। इसके पूर्व भी बजट का सबसे बड़ा हिस्सा आवंटित होता रहा है। लेकिन पटना में एक भी ऐसा स्कूल नहीं, जहां सभी विषयों के शिक्षक नियुक्त हों। बता दें कि बिहार में हर साल शिक्षा के बजट पर बड़ी धनराशि खर्च हो रही है। तब भी हालात नहीं सुधर रहे हैं। इस बार २०२२-२३ के शिक्षा बजट में बढ़ोतरी की गई है। शिक्षा के लिए ३९,१९१.८७ करोड़ रुपए का बजट है जो कुल बजट का १६.५ फीसदी हिस्सा है। करोड़ों के बजट के बाद भी न तो स्कूलों के भवन ठीक हैं और न ही शिक्षकों की कमी दूर हो पा रही है। शिक्षा की बदहाल स्थिति के बीच अफसर भी कोई जवाब नहीं देते हैं। स्कूलों की मांग के बाद भी संसाधन नहीं बढ़ाए जा रहे हैं। जांच से बिहार में शिक्षा की जो तस्वीर सामने आई वह धुंधली साबित हुई है। पटना के अधिकतर स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। भवन नहीं होने के कारण कई स्कूलों में दो क्लास के बच्चे एक साथ पढ़ते हैं। पटना के पॉश इलाकों में चल रहे स्कूलों की हालत तो और भी खराब है। भवन और शिक्षकों की कमी से पूरी व्यवस्था डगमगा गई है।
बच्चों का भविष्य खराब
पटना की एजी कॉलोनी में १९८७ से मध्य विद्यालय चल रहा है। अभी तक १ से ८ तक के बच्चों के लिए भवन नहीं बना है। शिक्षिका संध्या कुमारी ने बताया कि शिक्षकों और भवन की कमी से बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है। कई क्लास के बच्चे एक साथ पढ़ाई को मजबूर हैं। वीरचंद पटेल पथ पर बालक मध्य विद्यालय के भवन में ३ विद्यालय जुगाड़ से चल रहे हैं। ६ कमरे का एक बालिका मध्य विद्यालय है। वहीं ३ कमरे में २ विद्यालय चलते हैं। यहां भी शिक्षकों की भारी कमी है।
शिक्षा की नींव ही गड़बड़
प्राथमिक शिक्षक संघ के सदस्य राजकुमार का कहना है कि राज्य में शिक्षकों के लगभग २.५ लाख पद खाली हैं। कक्षा ६ से ८ तक के विद्यालयों में शिक्षकों की सबसे अधिक कमी है। राज्य में कोई ऐसा विद्यालय नहीं है, जहां एक साथ सभी विषयों के शिक्षक मौजूद हों। राजधानी पटना के साथ राज्य के लगभग सभी विद्यालयों का हाल ऐसा ही है। शिक्षकों की कमी से बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा नहीं मिल रही है। पटना के मध्य विद्यालय मीठापुर के प्राचार्य ने कहा कि शिक्षकों की कमी के साथ भवन की भी समस्या है। ऐसे में बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

अन्य समाचार