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उपेक्षित हैं चंद्रयान-गगनयान के उपकरण बनाने वाले एचईसी कर्मी … मतलब निकल गया तो पहचानते नहीं!

•  कोई बेच रहा लिट्टी-चोखा
• तो कोई चला रहा ऑटो!

सामना संवाददाता / रांची
चंद्रयान- ३ की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग कराकर ‘इसरो’ ने अंतरिक्ष में ऐतिहासिक सफलता हासिल की। हालांकि, पीएम मोदी और उनकी भाजपा इसका श्रेय लूटने का हरसंभव प्रयास कर रही है। ऐसा करके केंद्र सरकार उन इंजीनियरों एवं दूसरे र्कमचारियों की उपेक्षा और अपमान कर रही है, जिनके अथक परिश्रम से हिंदुस्थान का नाम बुलंदियों पर पहुंचा है। इसी बीच चंद्रयान व गगनयान जैसे अभियानों से जुड़े कुछ कर्मचारियों की दुर्दशा की पोल खोलनेवाली एक खबर सामने आई है। चंद्रयान-गगनयान के उपकरण बनाने वाले एचईसी (हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन) कर्मचारियों से जुड़ी उक्त रिपोर्ट बेहद चौंकानेवाली है।

बता दें कि १५ नवंबर १९६३ को दीपावली के दिन रांची स्थित जिस हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन का उद्घाटन देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने किया था, आज उसके विशाल कारखानों के परिसरों में उदासी और मायूसी का गहरा अंधकार है। कारखाने की ड्यूटी के बाद उसका कोई कर्मचारी फुटपाथ पर लिट्टी-चोखा का ठेला लगाता है तो कोई मोमो-बर्गर का स्टॉल चला रहा है। इसी तरह कुछ कर्मचारियों के पार्ट टाइम फूड डिलिवरी ब्वॉय की नौकरी करने तथा कुछ के लोन पर लिया गया ऑटोरिक्शा चलाने की भी जानकारी सामने आई है। ये वो लोग हैं, जिन्होंने चंद्रयान-३ के लिए लॉचिंग पैड सहित कई उपकरण बनाए हैं। इसरो के अगले प्रोजेक्ट गगनयान के लॉचिंग पैड और कई उपकरण बनाने का असाइनमेंट भी रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे इन्हीं लोगों के भरोसे पूरा होना है।
ये लोग एचईसी (हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन) नामक उस पब्लिक सेक्टर उपक्रम के कर्मी हैं, जो देश में मदर ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज के रूप में मशहूर रहा है।
बंद होने के कगार पर है कंपनी
करीब २२ हजार कर्मचारियों के साथ शुरू हुई कंपनी में अब ३,४०० कर्मचारी-अधिकारी हैं। कंपनी पर कर्ज और बोझ इस कदर बढ़ा है कि इन्हें १७-१८ महीने से वेतन नहीं मिला है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आईआईटी मद्रास से इंजीनियरिंग करने के बाद एचईसी में नौकरी करने वाले गौरव सिंह के घर के सारे सामान आर्थिक तंगी की वजह से बिक गए और उन्होंने अपने परिजनों को गांव भेज दिया है। इंजीनियर गणेश दत्त भी पैसे की कमी की वजह से डिप्रेशन में हैं। उन्होंने भी अपनी पत्नी और बच्चों को ससुराल में छोड़ दिया है। इलेक्ट्रिशियन के तौर पर काम करने वाले विनोद कुमार धुर्वा के सेक्टर-४ में साइकिल रिपेयरिंग की दुकान चलाते हैं। उनकी दो बेटियां और एक बेटा है। बेटी की शादी करनी है, लेकिन पैसे के अभाव में नहीं कर पा रहे हैं। घर की माली हालत बेहद खराब है। इसी तरह अरविंद सिंह ने दो साल पहले बेटी की शादी के लिए कर्ज लिया था। कर्ज न चुका पाने की वजह से अब देनदारी लगभग दोगुनी हो गई है। एचईसी के फाउंड्री फोर्ज प्लांट में मोल्डिंग का काम करने वाले हरिहर बड़ाईक पार्टटाइम ई-रिक्शा चलाते हैं तब जाकर घर में दो वक्त का खाना बन पा रहा है। एचईसी की टेक्निकल यूनिट में काम करने वाले शैलेश कुमार उर्फ दीपू लाल ने जेपी मार्केट में फर्नीचर की छोटी सी दुकान खोल रखी है। एचईसी श्रमिक संघ के महामंत्री वेद प्रकाश सिंह ने मीडिया को बताया कि यहां काम करने वाले हर कर्मचारी अब पाई-पाई के मोहताज हैं। हम लोग सरकार से लगातार मदद की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है। एचईसी मजदूर संघ के महामंत्री रमाशंकर प्रसाद का कहना है कि कई इंजीनियर रिजाइन करके जा रहे हैं, शायद सरकार यही चाहती है कि लोग खुद छोड़कर चले जाएं। इसी तरह सीनियर मैनेजर ऋषिकेश कुमार कहते हैं कि हम सांसद से लेकर राष्ट्रपति तक गुहार लगा रहे हैं। जीवन-यापन बहुत मुश्किल हो गया है। यहां काम करने वाला हर कर्मचारी कर्ज में डूब चुका है। कंपनी के एक अधिकारी बताते हैं कि अभी भी कंपनी के पास करीब १,२०० करोड़ रुपए का वर्क ऑर्डर है, लेकिन वर्क ऑर्डर को पूरा करने के लिए कंपनी के पास वर्विंâग वैâपिटल नहीं है। इसरो के आगामी महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट गगनयान के लिए लॉचिंग पैड, टावर क्रेन, होरिजेंटल स्लाइडिंग डोर सहित कई उपकरण बनाने का ऑर्डर भी एचईसी को मिला है।

कंगाल हो चुकी है कंपनी
बता दें कि एचईसी के ऊपर वर्तमान में १,२०० करोड़ से ज्यादा की देनदारियां हैं, जिसमें हर रोज बढ़ोतरी हो रही है। जो देनदारियां हैं, उसमें वेंडरों के १४०.११ करोड़, सरकार का कर्ज ११७.५८ करोड़, बैंक लोन २०२.९३ करोड़, सीआईएसएफ का १२१ करोड़, बिजली बिल मद में १५३.८३ करोड़, वेतन मद में ३८.२८ करोड़, ठेका कर्मियों का १५.९४ करोड़, एरियर मद में ४.८९ करोड़, पानी शुल्क मद में ४८.०६ करोड़, सिक्योरिटी डिपॉजिट ३७.८९ करोड़ सहित अन्य मदों में ३७.४५ करोड़ रुपए शामिल हैं।

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