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डेंगू को लेकर हाईकोर्ट की फटकार… राज्य सरकार व नगर निगम को ढिलाई न बरतने का दिया आदेश

मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ
कोरोना के दौरान बड़े-बड़े दावे करनेवाली यूपी सरकार मच्छर जनित रोगों को रोकने में फिसड्डी साबित हो रही है। जिसको लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राजधानी समेत प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की किल्लत, चिकित्सा सुविधाओं की कमी व डेंगू की रोकथाम मामले की कार्रवाई से कोर्ट संतुष्ट नहीं है। कोर्ट ने राज्य सरकार व नगर निगम लखनऊ के अफसरों को किसी तरह ढिलाई न बरतने का आदेश दिया है। साथ ही सरकारी व नगर निगम के जिम्मेदार अफसरों को शहर में स्वच्छता व मच्छरों को रोकने और जरुरी उपाय करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि लखनऊ में अभी जरुरत के मुताबिक नगर निगम फॉगिंग नहीं करवा पा रहा है। न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर दी। याचिका में डेंगू व अन्य मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम समेत सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं का मुद्दा उठाया गया है। अधिवक्ता एस़के़ मिश्र का कहना था कि वर्तमान में राजधानी समेत प्रदेश में डेंगू, मलेरिया व वायरल बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं। जबकि सरकारी अस्पतालों में जांच व दवाओं की सुविधा पूरी नहीं पड़ रही है। लोग परेशान हैं। इस पर कोर्ट ने सरकारी वकील से अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं के उच्चीकरण को लेकर जवाब मांगा था। खासतौर पर प्लाज्मा की उप्लब्धता के बारे में, जिसकी मरीजों को सख्त जरूरत है। कोर्ट ने नगर निगम से भी पूछा था कि डेंगू से बचाव व बुखार को रोकने के क्या कदम उठाए गए हैं? इसके तहत राज्य सरकार व नगर निगम लखनऊ के अधिवक्ताओं ने जवाब पेश किए। उधर, याची का कहना था कि कोर्ट के आदेश के बावजूद स्कूलों में मच्छर जनित बीमारियों को लेकर पर्याप्त उपाय नहीं किए जा रहे हैं। याची का यह भी कहना था कि स्कूलों में की जा रही कार्रवाई का जिक्र भी जवाब में नहीं किया गया है।

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