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घाटी में राजमार्ग असुरक्षित! शिवसेना जम्मू-कश्मीर इकाई ने उठाई आवाज

  • पैकेज के बावजूद नहीं लगे सीसीटीवी कैमरे 

सामना संवाददाता / जम्मू
कश्मीर घाटी में बढ़ती आतंकवादी घटनाओं एवं लक्षित हत्याओं पर अंकुश लगाने व कश्मीरी हिंदुओं, अल्पसंख्यकों समेत आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में केंद्र की भाजपा सरकार पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है। कश्मीर में आए दिन सार्वजनिक स्थलों पर हत्याएं होने के बावजूद किसी भी हत्या का सीसीटीवी फुटेज  सामने नहीं आना हैरान करने वाला मामला है। शिवसेना जम्मू-कश्मीर इकाई प्रमुख मनीष साहनी ने कश्मीर में नागरिकों की हत्याओं को अंजाम देनेवालों की पहचान करनेवालों में भय पैदा करने के लिए घाटी में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की मांग की है। साहनी ने कहा कि २०२२ में कश्मीर घाटी के सरकारी स्कूल  समेत घाटी के कई सार्वजनिक स्थलों पर अब तक १३ हत्याएं हो चुकी है और किसी भी घटना की सीसीटीवी कैमरे  के फुटेज  सामने नहीं आ पाए। मनीष साहनी ने कहा कि कश्मीर घाटी के असुरक्षित माहौल और हत्याओं को रोकने में नाकामी का नतीजा है कि प्रधानमंत्री रोजगार पैकेज के तहत कश्मीर में पुनर्वास के लिए नौकरी प्राप्त कर घाटी में सेवाएं दे रहे कश्मीरी पंडितों, रिजर्व कैटेगिरी  के हिंदू कर्मचारियों समेत प्रवासी मजदूरों को कश्मीर घाटी छोड़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। साहनी ने कहा कि गृह मंत्रालय ने कश्मीर घाटी में सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरों  को अहम मानते हुए वर्ष २०२० में पुलिस आधुनिकीकरण के तहत सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश जारी किए थे, लेकिन दो साल बाद भी सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जा सके। इस मौके पर मीनाक्षी छिब्बर, विकास बख्शी, राकेश गुप्ता, संजीव कोहली, बलवंत सिंह, राज सिंह, बिन्नी महाजन, शशिपाल सहित बड़ी संख्या में शिवसैनिक मौजूद रहे।

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