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स्कूलों में छात्रों का नहीं रहा कोई रक्षक, तिलक-हिजाब पर हैवान बना शिक्षक! चौथी में पढ़नेवाली छात्राओं को लात-घूंसों से पीटा

सामना संवाददाता / कश्मीर। कर्नाटक में उठे हिजाब विवाद का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में एक शिक्षक ने दो बच्चियों को इसलिए पीटा, क्योंकि वे तिलक लगाकर और हिजाब पहनकर स्कूल आर्इं थीं। चौथी क्लास में पढ़ने वालीं ये बच्चियां जब द्रामन गांव के गवर्नमेंट मिडिल स्कूल पहुंचीं तो निसार अहमद नाम के टीचर ने इन्हें बुरी तरह मारा-पीटा। शिक्षक द्वारा की गई इस निर्दयता को लेकर अब अभिभावक भी यह कहने लगे हैं कि स्कूलों में छात्रों का अब कोई रक्षक नहीं रह गया है, जिसके चलते शिक्षक ही अब हैवान बन गए हैं। खबर लिखे जाने तक घटना के सामने आते ही निसार को सस्पेंड कर दिया गया है। पुलिस ने निसार को अरेस्ट कर लिया है, लेकिन पुलिस ने अभी तक इस मामले में सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने का केस दर्ज नहीं किया है।
पीड़ितों ने वीडियो में बताई आपबीती
राजौरी के पीड़ित परिवार का एक वीडियो भी सामने आया है। जिसमें निसार अहमद पर बच्चियों को पीटने का आरोप लगाया है। वीडियो में पिता अंग्रेज सिंह कह रहे हैं कि जिस तरह से मेरी और शकूर की बेटी को पीटा गया है, कल कोई दूसरा टीचर भी तिलक और नकाब पहनने पर बच्चों को पीट सकता है। मैं सरकार से अपील करता हूं कि इसकी जांच होनी चाहिए। मुझे न्याय चाहिए। ये सांप्रदायिक एकता को बिगाड़ने की चाल है। हम इस जगह को बिहार या कर्नाटक नहीं बनने देंगे।
निसार पर हो सकती है कार्रवाई
प्रशासन के मुताबिक शिक्षक पर बच्चे को चोट पहुंचाने का आरोप लगा सकते हैं। यह एक अपराध है, जिसके लिए उसे आईपीसी की धारा ३२३, ३२५, ३५२ और ५०६ के तहत सजा हो सकती है। जबकि धारा २३ जेजे अधिनियम, २००० के मुताबिक इसके लिए छह महीने तक की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकता है। अधिकारियों का कहना है कि अगर निसार दोषी पाया जाता है, तो उस पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत केस चलाया जाएगा।

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