मुख्यपृष्ठनए समाचारज्ञानवापी प्रकरण में हिंदू पक्ष दो फाड़ में

ज्ञानवापी प्रकरण में हिंदू पक्ष दो फाड़ में

एक ने इस प्रकरण को आपसी समझौते से निपटारे की कही बात तो दूसरे पक्ष ने इसे नकारा
उमेेश गुप्ता / वाराणसी
काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित ज्ञानवापी परिसर प्रकरण में इन दिनों हिंदू पक्ष दो भागों में बंट चुका है। एक हिंदू संगठन ने खुला पत्र लिखकर विवाद को अदालत के बाहर सुलझाने की मांग की है। यह पत्र ऐसे समय आया है, जब वाराणसी जिला अदालत के आदेश पर ज्ञानवापी परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण चल रहा है। वहीं दूसरे ह‍िंंदू गुट के पक्ष के एक वकील ने इसे स‍िरे से खार‍िज कर द‍िया है।
एक गुट का नेतृत्व कर रहे विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह बिसेन ने एक खुला पत्र लिखकर ज्ञानवापी परिसर विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने के लिए हिंदू और मुस्लिम पक्षों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है।
बिसेन ने कहा कि मामले की मुख्य वादी राखी सिंह की सहमति के बाद हिंदू पक्ष की ओर से पत्र जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर यह मामला आपसी सहमति से सुलझ सकता है तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता।
बिसेन ने अपने पत्र में कहा कि कुछ असामाजिक तत्व अपने निजी स्वार्थ के लिए हिंदू और मुसलमानों के बीच इस संवैधानिक लड़ाई का फायदा उठाना चाहते हैं, जो देश और समाज दोनों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे में हम सभी का कर्तव्य है कि हम अपने देश और समाज की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस विवाद को आपसी बातचीत के जरिए शांतिपूर्वक सुलझाकर एक मिसाल कायम करें।
पत्र में लिखा है कि यह संभव है कि उपरोक्त मामले में अदालत के बाहर आपसी बातचीत से कोई शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके। हम इस बातचीत में आप सभी का खुले और शुद्ध दिल से स्वागत करते हैं। दूसरी ओर इंतजामिया मस्जिद कमेटी के संयुक्त सचिव मोहम्मद यासीन ने कहा कि कमेटी को पत्र मिल गया है और बैठक में इस पर विचार किया जाएगा। यासीन ने कहा हमें मीडिया के माध्यम से पत्र मिला है। पत्र को समिति की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। समिति के सदस्य जो भी निर्णय लेंगे वह मान्य होगा।
इस बीच मामले में अन्य हिंदू वादियों के वकील हरि शंकर जैन व व‍िष्‍णु शंकर जैन ने एक पोस्ट में कहा कि मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि सनातन धर्मी काशी में भोलेनाथ के एक इंच पर समझौता नहीं करेंगे, संभव है कि मुसलमानों को माफी मांगनी चाहिए। और अवैध कब्जा हटाना चाहिए।

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