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कट्‌टरपंथियों के निशाने पर हैं हिंदू टीचर…. तालिबान के रास्ते पर बांग्लादेश!

• खौफ में जी रहे हैं अल्पसंख्यक हिंदू
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
बांग्लादेश के हिंदू दशकों से खौफ के साए में जी रहे हैं, लेकिन अब ये दहशत उन इलाकों में भी पहुंच रही है, जहां पहले ऐसा नहीं हुआ था। बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। हिंदुओं के घरों और दुकानों को लूट लिया जाता है। महिलाओं के गहने भी छीन लिए गए। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले की ये कोई पहली या अकेली घटना नहीं है। इसी साल मार्च में भीड़ ने एक हिंदू मंदिर पर हमला कर दिया था। बाद में प्रशासन ने इसे प्रॉपर्टी विवाद से जुड़ा बताया था। जानकारों का कहना है कि तालिबान के रास्ते पर बांग्लादेश भी चल रहा है। बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमलों की वजह से देश में हिंदू और अल्पसंख्यक आबादी सिमट गई है। इन हमलों का एक बड़ा मकसद हिंदुओं में इतना खौफ पैदा करना है कि वो देश छोड़कर हिंदुस्थान जाने के लिए मजबूर हो जाएं। यही वजह है कि आजादी के समय २९.७ प्रतिशत आबादी अल्पसंख्यकों की थी जो १९७० में १९ प्रतिशत रह गई थी। हिंदुओं का लगातार शोषण होता रहा है।

‘अल्पसंख्यकों की सुननेवाला कोई नहीं’
बांग्लादेश में हाल के सालों में हिंदुओं पर हमलों के पीछे सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद या धार्मिक पुस्तक के कथित अपमान से खड़े हुए विवाद रहे हैं लेकिन मानवाधिकार कार्यकर्ता मानते हैं कि देश के सक्रिय कट्टरवादी योजनाबद्ध तरीके से हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं। हिंसा की घटनाएं न रुकने की वजह अपराधियों को सजा नहीं मिलती। मामले अदालत में लंबित पड़े रहते हैं। हमलावरों को सजा न मिलना ऐसे हमले होते रहने की सबसे बड़ी वह है। हमलावरों में कानून का कोई डर नहीं है।

‘हिंदुओं को भगा देना चाहते हैं कट्‌टरपंथी’
जिहाद वॉच किताब के लेखक और इस्लामी चरमपंथ पर नजर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक रॉबर्ट स्पेंसर कहते हैं, ये साफ है कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले धर्म से प्रेरित हैं। यहां के मुसलमान हिंदुओं को देश से हमेशा के लिए भगा देना चाहते हैं।

संविधान में धर्मनिरपेक्षता लेकिन दिखावे के लिए
बांग्लादेश के संविधान के मुताबिक इस्लाम देश का आधिकारिक धर्म है। हालांकि संविधान में धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत भी है। जब बांग्लादेश का एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में उदय हुआ, तब ४ नवंबर १९७२ को लागू देश के संविधान में धर्म से जुड़ा कुछ नहीं था। अब संविधान की प्रस्तावना के ऊपर ही बिस्मिल्लाह लिखा है और १९८८ के बाद से इस्लाम राज्य का धर्म है। हालांकि अनुच्छेद १२ के तहत धर्मनिरपेक्षता को राज्य का सिद्धांत घोषित किया गया है। संविधान में भले ही धर्मनिरपेक्षता हो लेकिन वास्तव में ये कहीं नहीं हैं।

‘खतरे में है हिंदुओं का अस्तित्व’
बांग्लादेश के सरकारी संगठन बांग्लादेश हिंदू, बौद्ध, ईसाई एकता परिषद के राष्ट्रीय महासचिव राणादास गुप्ता का कहना है कि बांग्लादेश में हिंदुओं का अस्तित्व खतरे में है। राणा दासगुप्ता कहते है कि बांग्लादेश में हिंदुओं का अस्तित्व खतरे में हैं, क्योंकि उनके घरों, मंदिरों, व्यापारिक ठिकानों पर लगातार हमले हो रहे हैं। उनकी जवान लड़कियों का अपहरण किया जा रहा है। हिंदू डरे हुए हैं। उनके सामने अपनी जमीन और घरों को बचाने की चुनौती है। उनके मंदिर और महिलाएं खतरे में हैं।

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