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मोदी-‘मामा’ के राज में घर छोड़ने को मजबूर हिंदू… खरगोन में दंगाइयों का खौफ

३५ हिंदू परिवारों ने वापस नहीं लौटने का लिया प्रण
सामना संवाददाता / भोपाल। रामनवमी के दिन मध्य प्रदेश के खरगोन में हुई धार्मिक हिंसा के बाद हिंदुओं में खौफ का माहौल है। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राज्य में मामाजी के नाम से लोकप्रिय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की हिंदुत्ववादी सरकार के होने के बाद भी खौफजदा ३५ हिंदू परिवार अपना घरबार छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। इस पर भाजपा और खासकर मोदी और मामाजी के हिंदुत्व पर सवाल उठ रहे हैं। बता दें कि खरगोन में हिंसा के बाद आज कर्फ्यू का सातवां दिन है। रामनवमी के दिन हुई भीषण हिंसा की वजह से पूरे देश में खरगोन की चर्चा हो रही है।
क्योंकि राज्य और केंद्र में भाजपा के ही मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री होने के बाद भी खरगोन के कई मुहल्लों में दंगों की आग दावानल की तरह ही पैâलती चली गई। सबसे ज्यादा हिंसा खरगोन के संजय नगर में हुई है, जहां दंगाइयों ने न सिर्फ घरों में घुसकर लूटपाट की बल्कि आगजनी भी की। इससे किसी का आशियाना उजड़ गया तो किसी के रोजगार का जरिया ही छिन गया। लोग दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं। जिले के सात क्षेत्रों में दंगाइयों ने चुन-चुनकर हिंदू परिवारों पर कहर बरपाया। पेट्रोल बम फेंककर घरों को फूंक दिया। कहीं रुपए गहने लूट लिए, तो कहीं से अनाज लूटकर ले गए। दंगे में ७५ से ज्यादा मकानों में तोड़फोड़ और आगजनी हुई। दंगाइयों की दहशत से प्रभावित इलाकों के ३५ हिंदू परिवार घर छोड़कर जा चुके हैं। छह दिन बात स्थिति अब भी ऐसी है कि कोई घर लौटना नहीं चाहता।
हिंदू-मुस्लिम तो बहाना है, असल मुद्दों से ध्यान भटकाना है
वरुण गांधी ने बताई भाजपा की असलियत
दो दिवसीय दौरे पर पीलीभीत पहुंचे सांसद वरुण गांधी ने कहा कि असल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए हिंदू-मुस्लिम के मुद्दों को तूल दिया जा रहा है। उन्होंने निजीकरण का विरोध करते हुए युवाओं के रोजगार का मुद्दा उठाया। बोले, जब सरकारी संस्थान नहीं होंगे तो सरकारी नौकरियां कहां से आएंगी? सांसद वरुण गांधी का शनिवार को खमरिया पुल पर बड़ी संख्या में पहुंचे समर्थकों ने स्वागत किया। उसके बाद वह काफिले के साथ शंकर सॉल्वेंट पहुंचे। यहां कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि असली लड़ाई रोजगार और भ्रष्टाचार की है। राजनीतिक दल और नेताओं को आपसी खींचतान छोड़ देश के भविष्य के लिए सोचना चाहिए। राष्ट्र का भविष्य भाषण से, चुनाव जीतने-हारने से नहीं बल्कि सच्ची देश सेवा से बनता है। रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि खाते में पैसे नहीं आए। दो करोड़ नौकरियां मिलनी थीं, नहीं मिलीं। किसान की आय दोगुनी नहीं हुई। युवाओं को रोजगार देना सरकार का दायित्व है, यह कोई दया नहीं है। निजीकरण होगा तो नौकरियां भी सीमित होंगी। बेरोजगारी बढ़ेगी। वरुण ने कहा कि जब राजनीति सेवा की जगह पेशा बन जाती है तो अभिशाप बन जाती है।

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