मुख्यपृष्ठग्लैमर‘उनका गुस्सा कभी-कभी जायज लगता है!’-अलंकृता सहाय

‘उनका गुस्सा कभी-कभी जायज लगता है!’-अलंकृता सहाय

दीपक तिजोरी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘टिप्सी’ में मॉडल-अभिनेत्री अलंकृता सहाय ने मध्यवर्ती भूमिका निभाई है। मूलत: दिल्ली निवासी अलंकृता ने अपनी पढ़ाई दिल्ली और नोएडा में पूरी की और कॉलेज की पढ़ाई कैलिफोर्निया (अमेरिका) में की। ‘मिस अर्थ’ से सम्मानित अलंकृता ने थ्रिलर फिल्म ‘द इन्कंप्लीट मैन’ के अलावा कॉमेडी फिल्म ‘लव पर स्क्वैर’ और ‘नमस्ते इंग्लैंड’ जैसी फिल्में भी की हैं। पेश है, अलंकृता सहाय से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

फिल्म ‘टिप्सी’ आपको कैसे मिली?
निर्देशक दीपक तिजोरी के ऑफिस से मुझे ऑडिशन के लिए फोन आया था। दीपक तिजोरी ने कहानी का नैरेशन दिया और मुझे फिल्म की कहानी बेहद पसंद आई। बतौर एक्टर मैंने दीपक तिजोरी का काम देखा है।

दीपक तिजोरी के साथ फिल्म करने का अनुभव कितना अलग रहा?
वो सीनियर एक्टर हैं और मैंने एक काबिल निर्देशक उनमें देखा। मैंने महसूस किया कि वे बेहद शांत स्वभाव के हैं। अपना आपा कभी न खोनेवाला ऐसा निर्देशक मैंने पहले कभी नहीं देखा। वो बहुत ही कूल हैं। सेट पर सबसे ज्यादा गुस्सा होनेवाले अक्सर निर्देशक ही होते हैं। पूरी फिल्म का कप्तान होने के नाते उनका गुस्सा कभी-कभी जायज लगता है। लेकिन फिल्म ‘टिप्सी’ के दौरान गुस्से वाली स्थिति में भी वो बहुत शांत दिखे। यह गुण बहुत कम ही व्यक्तियों में देखा जाता है।

दो अभिनेत्रियों की आपस में नहीं जमती, जबकि फिल्म में पांच अभिनेत्रियों ने एक साथ काम किया है?
समस्त महिलाओं के बारे में ऐसा अनुमान लगाना सरासर गलत है। हम सभी ने न केवल अपनी फिल्म की शूटिंग पूरी की, बल्कि बहुत धमाल करने के साथ ही पूरे गोवा का सैर-सपाटा भी टू व्हीलर पर किया। हम सभी ने जिंदगी भर की दोस्ती बनाई। कायनात अरोरा बहुत प्यारी हैं और वो सभी के लिए खाना बनाकर लाती थीं। शूटिंग के दौरान ऐसा लग रहा था कि फिल्म की शूटिंग कभी खत्म ही न हो।

सुना है कि शूटिंग के दौरान आपके साथ हादसा हो गया था?
शूटिंग के दौरान मुझे बाइक पर शॉट देना था, जो पानी में गिर जाती है। शॉट रिस्की था इसलिए काफी एहतियात बरती गई, लेकिन मामला गड़बड़ा गया और गलत जंप के कारण मेरा होंठ इस कदर फट गया कि खून रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। सेट पर सभी के पसीने छूट गए। किसी की कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि इमरजेंसी के मौके पर क्या किया जाए। सभी को लगा कि कहीं शूटिंग के साथ फिल्म का पैकअप न हो जाए। मुझे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने टांके लगाए। इन टांकों को एक सप्ताह बाद निकालना था, लेकिन मैं नहीं चाहती थी कि मेरी वजह से फिल्म का आर्थिक नुकसान हो और फिल्म की शूटिंग खटाई में पड़े। मैंने स्टेरॉइड्स के बूस्टर डोस लिए और तीन दिन में मेरे टांके काटे गए और चौथे दिन से शूटिंग शुरू हुई। घटना गंभीर थी लेकिन ईश्वर की कृपा से मैं बच गई और जल्द ही ठीक हो गई।

सुना है, इसी फिल्म के दौरान आपके पिता का देहांत हो गया था?
मेरे पिता मेरे लिए मेरी दुनिया और मेरे मेंटॉर थे। मैंने जीवन में कभी हार मानना नहीं सीखा। जब मैंने फिल्म ‘टिप्सी’ साइन की पापा से इस फिल्म के बारे में डिस्कस भी किया था। पापा बेहद खुश थे, लेकिन एक महीने बाद जब फिल्म की शूटिंग शुरू होनेवाली थी पापा को अचानक कार्डियक अरेस्ट हुआ और इस दर्दनाक हादसे के बाद मेरी दुनिया उजड़ गई। पापा को मैं कभी भी नहीं भुला सकती।

आप ‘मिस अर्थ’ का खिताब पा चुकी हैं। कैसा रहा वो अनुभव?
२०१८ में फिलीपींस (मनीला) में हुए इस ब्यूटी कॉन्टेस्ट में ४० फाइनलिस्ट युवतियां विश्वभर से शरीक हुई थीं। हर लड़की की तरह मैं भी विचारों के बवंडर का सामना कर रही थी। इस कॉन्टेस्ट में मैंने कुल सात खिताब पाए, जिसमें ‘मिस ब्यूटी’, ‘मिस फोटोजेनिक’ और भी कई खिताब हैं, जिनमें एक महत्वपूर्ण पुरस्कार ‘मिस अर्थ’ का था। यह खिताब मैंने अपने देश को समर्पित किया।

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