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३२ साल बाद फिर ताजा हुआ बाबरी गिराने का इतिहास : बालासाहेब बोले, शाबाश! …यही हमारा मेडल है!

विवादग्रस्त मस्जिद गिराई इसलिए राममंदिर का निर्माण हुआ
पहली कारसेवा करनेवाले शिवसैनिकों की यादें ताजा हो गईं
सामना संवाददाता / मुंबई
हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख माननीय बालासाहेब ठाकरे के आदेश पर हमारा १०० सदस्यीय दल मुंबई से पवन एक्सप्रेस से अयोध्या के लिए रवाना हुआ। लखनऊ उतरने के बाद बस द्वारा आगे की यात्रा शुरू की। हमें अयोध्या से १० किलोमीटर पहले रोका गया, लेकिन हम अपनी जान की परवाह किए बिना पुलिस से बचते हुए अयोध्या पहुंच गए। अगली सुबह साढ़े नौ बजे से हम फावड़ा, कुदाल और दूसरे औजार लेकर बाबरी मस्जिद पर पहुंचे। दोपहर में बाबरी गिरने के बाद हम सभी ने `प्रभु जय श्रीराम’ का नारा लगाया। जब हम मुंबई आए तो परेल के दामोदर हॉल में बालासाहेब ने हमारा विशेष सत्कार किया। बालासाहेब ने कहा, `शाबाश, बाबरी तोड़ी यही हमारा पदक है।’ अगर बाबरी मस्जिद नहीं ढहाई गई होती तो आज अयोध्या में राम मंदिर खड़ा नहीं हो पाता।
प्रभु श्रीरामचंद्र की मातृभूमि को स्वतंत्र कराने का कर्तव्य निभाने वाले शिवसैनिकों की एक विशेष बैठक आज शिवसेना नेता सुभाष देसाई की अध्यक्षता में शिवसेना भवन में हुई। ३२ साल बाद बाबरी गिराने का इतिहास उस समय कारसेवा में शामिल हुए शिवसैनिकों ने ताजा कर दिया। २२ जनवरी को अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का उद्घाटन किया जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में शिवसेना भवन में आयोजित एक विशेष बैठक में भगवान श्रीराम के राम मंदिर के लिए शिवसेना और शिवसैनिकों द्वारा दिए गए योगदान की जानकारी दी गई। इस अवसर पर शिवसेना नेता चंद्रकांत खैरे, विश्वनाथ नेरुरकर, उपनेता मिलिंद वैद्य, रवींद्र मिरलेकर, विभागप्रमुख आशीष चेंबूरकर, डॉ. विश्वनाथ मूंदड़ा, श्रमिक नेता बाबा कदम समेत कारसेवा करनेवाले करीब ५५ शिवसैनिक मौजूद थे।
सबूतों के साथ नासिक में प्रदर्शनी लगाई जाएगी
बाबरी तोड़कर भगवान राम के मंदिर में अहम योगदान देनेवाले शिवसैनिकों के योगदान की दो दिवसीय प्रदर्शनी २२ और २३ जनवरी को नासिक में आयोजित की जाएगी। इस प्रदर्शनी में हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख माननीय बालासाहेब ठाकरे के साक्षात्कारों की कतरनें, वक्तव्य, अखबारों में छपी खबरें, कारसेवा कर रहे शिवसैनिकों से प्राप्त तस्वीरें और कारसेवा करके जेल से बाहर निकले लोगों के डिस्चार्ज कार्ड प्रस्तुत किए जाएंगे। सारे सबूतों के साथ ही बाबरी गिराने की जिम्मेदारी के साथ-साथ १९८९ में शिवसैनिकों द्वारा की गई कारसेवा के सबूतों के साथ जानकारी भी पेश की जाएगी।

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