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हिस्ट्रीशीटर को गिरफ्तार करने गई पुलिस पर फायरिंग … योगी राज में भारी माफिया!

६ वर्षों में हुई मुठभेड़ में १३ पुलिसकर्मी शहीद, १,४४३ हुए घायल
सामना संवाददाता / लखनऊ
योगी आदित्यनाथ ने १९ मार्च २०१७ को उत्तर प्रदेश के सीएम पद की शपथ ली थी, तब उन्होंने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने की बात कही थी। इसके तहत योगी ने एक न्यूज चैनल में दिए इंटरव्यू में कहा था कि जो गुनाह करेगा ठोक दिया जाएगा। उस दौरान सीएम योगी का ये बयान काफी चर्चाओं में आ गया था। इसके अलावा एक बार सदन में दिए भाषण में भी कहा था कि माफियाओं को मिट्टी में मिला देंगे। लेकिन उनका दावा उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है। राज्य की पुलिस जब गुंडों-माफियाओं को पकड़ने जाती है तो उन पर ही हमला किया जा रहा है। गुंडों को ठोंकने का दावा करने वाली योगी सरकार के राज में पुलिस वाले ठोंके जा रहे हैं। यदि २०१७ से २०२३ के बीच का आंकड़ा देखें तो इन ६ सालों के दौरान हुई मुठभेड़ों में १३ पुलिसकर्मी शहीद, तो १,४४३ घायल हुए हैं।
बता दें कि हाल ही में कन्नौज के गांव धीरपुर नगरिया में हिस्ट्रीशीटर अशोक यादव उर्फ मुन्ना को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस पर फायरिंग कर दी गई। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फायरिंग की, लेकिन उस वक्त तक उनके एक सिपाही सचिन राठी को गोली लग चुकी थी। सचिन राठी को तुरंत अस्पताल तो ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। सचिन की दो महीने बाद फरवरी में ही शादी होनी थी, ऐसे में उनके शहीद होने की खबर से उनके परिवार में मातम का महौल है। साथ ही इस घटना ने यूपी के बिकरू कांड की भी याद दिला दी है, जिसमें ८ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे।
ये मामला पहला नहीं है, उत्तर प्रदेश में आरोपियों को पकड़ने गए कई पुलिस जवानों पर फायरिंग की खबरें सामने आती रहती हैं। पिछले एक साल में सीएम योगी के कार्यकाल में १८३ अपराधियों के एनकाउंटर हुए हैं, जिनमें ५ हजार से ५ लाख तक के इनामी अपराधी शामिल थे। हालांकि, यूपी पुलिस के दावे के अनुसार, २०१७ से २०२३ अप्रैल माह तक बदमाशों को पकड़ने गए १३ पुलिसवालों के शहीद होने एवं १,४४३ की दुखद घटनाएं भी सामने आई हैं।
अक्सर होते हैं पुलिसवालों पर हमले
१७ अप्रैल २०२३ को भी पुलिस की मुठभेड़ में फायरिंग का एक मामला सामने आया। आजमगढ़ के रहने वाले आरोपी आरुष अरोड़ा उर्फ लव ने अपने साथियों के साथ कार सवार लोगों पर गोली चला दी थी, जिसके बाद पुलिस फरार आरुष की तलाश में थी। जैसे ही पुलिस को आरोपी से संबंधित सूचना मिली तो पुलिस ने उक्त इलाके में घेराबंदी कर दी। चेकिंग के दौरान बदमाश ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने आरोपी के दोनों पैरों में गोली मार उसे घायल कर गिरफ्तार कर लिया। एक मामला १७ सितंबर २०२३ को सामने आया था, जब पिनाहट थाना क्षेत्र के गांव विप्रावली में ससुराल में विवाहिता के उत्पीड़न की शिकायत पर फोर्स के साथ पहुंचे एसओ पर लोगों ने लाठी-डंडों से हमला बोल दिया। जब पुलिस ने अपना बचाव किया तो लोगों ने उन पर पथराव कर दिया।
नहीं मिल रही सही ट्रेनिंग
इस मामले में रिटायर्ड आईएएस अमिताभ ठाकुर का कहना है कि पुलिस के बचाव के लिए सरकार ने जो उन्हें इन्फ्रास्ट्रक्चर दिया है उसे सुधारने की जरूरत है, क्योंकि पुलिस के पास अभी भी डिफेंस के लिए प्रॉपर इक्विपमेंट नहीं हैं। साथ ही पुलिसवालों को अब भी सही ट्रेनिंग नहीं मिल रही है। जिस तरह कहा जाता है कि १० अपराधी छूट जाएं लेकिन एक निर्दोष को सजा न हो, उसी तरह पुलिस को भी ये समझना होगा कि थोड़ी देर भले ही हो जाए, लेकिन वो बिना किसी तैयारी के अपराधियों को पकड़ने न जाएं।

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