मुख्यपृष्ठखबरेंएचआईवी को मुंबई दे रही मात! संक्रमित मरीज हुए कम

एचआईवी को मुंबई दे रही मात! संक्रमित मरीज हुए कम

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई। मुंबई में एचआईवी को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों का न केवल सकारात्मक असर साफ दिखाई दे रहा है, बल्कि इससे एचआईवी को मात देने में मदद भी मिल रही है। एचआईवी रोकथाम विभाग के अनुसार बीते कुछ वर्षों में ऐसे रोगियों की संख्या में कमी आई है। आकड़ों के मुताबिक मुंबई में इस समय ३६ हजार एचआईवी रोगियों का एंटीरेट्रो वायरल थेरेपी से इलाज किया जा रहा है।
३६ हजार रोगियों का एंटीरेट्रो वायरल थेरेपी से हो रहा इलाज
मुंबई डिस्ट्रिक्ट एड्स कंट्रोल सोसायटी (एमडैक्स) से मिले आंकड़ों के अनुसार मुंबई में वर्ष २०१६-१७ में ६,७७२ नए एचआईवी मरीज मिले थे, जबकि २०२०-२१ में यह आंकड़ा घटकर २,०६३ रह गया। वहीं चालू वर्ष में भी नए मरीजों की संख्या में कमी देखी गई है। फिलहाल मुंबई में एचआईवी संक्रमण दर ०.८ फीसदी यानी एक हजार लोगों का टेस्ट करने पर आठ लोग संक्रमित पाए जा रहे हैं।
जागरूकता से घटी बीमारी
एमडैक्स की अतिरिक्त परियोजना निदेशक डॉ. श्रीकला आचार्या ने कहा कि एआरटी सेंटर, जांच के लिए उपलब्ध संसाधनों और बीमारी के प्रति लोगों में बढ़ती जागरूकता के चलते मामलों में कमी दर्ज हुई है। हालांकि कोरोना की आई लहरों में टेस्टिंग प्रभावित हुई थी इसलिए नए मामले कम मिले थे। चालू वर्ष में टेस्टिंग सामान्य रही फिर भी नए मामले कम मिले हैं। दूसरी तरफ एड्स के प्रति चलाई जा रही जनजागृति का असर गर्भवती महिलाओं पर हो रहा है। यही वजह है कि गर्भवती महिलाओं के एचआईवी संक्रमित होने का प्रमाण कम हो गया है। वर्ष २०१९-२० में गर्भवती महिलाओं के एचआईवी संक्रमित होने का प्रमाण १४४ फीसद था, जो वर्ष २०२१-२२ में घटकर ४९ फीसद तक पहुंच गया है।
सुई से शून्य फीसदी है खतरा
डॉ. आचार्य ने कहा कि मुंबई में सुई से एचआईवी के पैâलने का खतरा शून्य फीसदी है। उन्होंने कहा कि यह बीमारी सुई से नशा करनेवालों में अधिक पैâलती है। फिलहाल मुंबई में सुई से नशा करने वालों की संख्या न के बराबर है। उन्होंने कहा कि मुंबई की तुलना में देश के नार्थ ईस्ट जैसे पंजाब, उत्तर प्रदेश में सुई से नशा करनेवालों की संख्या अधिक है। नशा करते समय एक ही सुई को कई लोग एक्सचेंज करते हैं, जिससे एचआईवी होने का खतरा अधिक बढ़ जाता है।
खून से संक्रमण के ०.०२ फीसदी मामले
डॉ. श्रीकला आचार्या ने बताया कि मुंबई में जनजागरण के चलते एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के खून से स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमित करने के मामले ०.०२ फीसदी के करीब है। उन्होंने कहा कि इससे संबंधित पैâलाई जा रही जागरूकता के चलते लोग सजग रहते हैं।
देश में हैं १७ लाख एचआईवी पॉजिटिव
हाल ही में नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन ने आरटीआई से जानकारी दी है कि पिछले १० सालों में हिंदुस्थान में १७ लाख लोग एचआईवी के शिकार हुए हैं। इन १७ लाख लोगों के एचआईवी पॉजिटिव होने का कारण असुरक्षित यौन संबंध है।

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