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घर स्वर्ग हो जाता है

घर स्वर्ग हो जाता है जीना अगर आ जाए
तन स्वस्थ मन प्रफुल्लित हो कलह न मचाए।
दूसरों की जिंदगी में चोंच मारते हैं जो
जयंत की तरह वह कहीं न शरण पाए।।
सींक का ही वाण मार दिया राम जी ने
घूमता ब्रह्मांड था कोई हाथ न लगाए।।
इंद्र का भी बेटा दंडित हुआ था वन में
कुदृष्टि नष्ट करके सुदृष्टि थे दिलाए।।
काम क्रोध लोभ तीनों छोड़ दिया जिसने
अत्रि और अनसूया के घर ही राम आए।।
देखा पहाड़ अस्थियों का करुणानिधान जब
निशिचर विहीन धरती करने का प्रण निभाए।।
आज के युवाओं से बस यही है प्रार्थना
समाज की रक्षा के लिए मेरी है अभ्यर्थना।
जहां कहीं भी वहनों पर दुष्टों की कुदृष्टि हो
स्वार्थ छोड़ सभी भाई जटायु बन जाए।।
सत्यभामा सिंह,
कल्याण, मुंबई

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