मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनासंसद में कैसे हुआ

संसद में कैसे हुआ

संसद में कैसे हुआ।
बेकारी का नाच।
षडयंत्रों ने जड़ दिया।
मुंह पर बड़ा तमाचा।।
कर्ज बोलता जा रहा।
कैसा हुआ विकास।।
उत्तर तो है ही नहीं।
बड़बोलों के पास।।
कई दिनों से मथ रही।
मन को कोई बात।।
यह कैसे बढ़ती गई।
घोर अंधेरी रात।।
कोई आकर पढ़ दिया।
ऐसा मंत्र फिजूल।।
सब के सब गाने लगे।
आदर्शों को भूल।।
आए दिन है हो रहा।
झगड़ा औ तकरार।।
इसीलिए तो हो रहा।
सारा बंटाधार।।
सबके भीतर जल रही।
अपनी-अपनी आग।।
कहां बचा है आदमी।
कहां बचा है त्याग।।
लालच ने है कर दिया।
सबका बंटाधार।।
भीतर-भीतर चल रहा।
मतलब का व्यापार।।
अंदर से है चल रहा।
गठजोड़ों का खेल।।
लोकतंत्र को खींचती।
पूंजीवादी रेल।।
अन्वेषी

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