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शिवसेनाप्रमुख और वीर सावरकर को कैसे भूल गए?

-‘भारत रत्न’ मामले पर सांसद संजय राऊत ने लगाई मोदी सरकार को फटकार

सामना संवाददाता / मुंबई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नरसिम्हा राव, चौधरी चरण सिंह और एम. एस स्वामीनाथन को भारत ‘रत्न’ से सम्मानित करने की घोषणा की। लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आगामी दिनों में देश में होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा सरकार ने ‘भारत रत्न’ सम्मान की घोषणा की है। एक सोची समझी राजनीति का यह हिस्सा माना जा रहा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा जोरों पर है। इस बीच अब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्ष के सांसद संजय राऊत ने भाजपा को फटकार लगाते हुए कहा है कि शिवसेनाप्रमुख और वीर सावरकर को कैसे भूल गए?
संजय राऊत ने आरोप लगाया है कि खुद को हिंदुत्ववादी कहने वाली मोदी सरकार एक बार फिर हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे और वीर सावरकर को भूल गई है। सांसद संजय राऊत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर भाजपा की जमकर आलोचना की है। उन्होंने कहा कि आज देश में राममंदिर निर्माण को लेकर उत्सव मनाया जा रहा है, जिनकी वजह से अयोध्या में पीएम मोदी राम मंदिर का जश्न मना रहे हैं, जिन्होंने पूरे भारत को हिंदूमय बनाया…जिनकी वजह से मोदी अयोध्या में राम मंदिर का जश्न मना सके। ऐसे में हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे को वैâसे भूल गए, इस सरकार ने न तो वीर सावरकर और न ही हिंदूहृदयसम्राट शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे को सम्मान दिया।
भाजपा ने नियम क्यों तोड़े?
संजय राऊत ने कहा कि केंद्र सरकार ने ‘भारत रत्न’ देने के नियमों का उल्लंघन किया है। पहले २ और अब ३, एक महीने में ५ नेताओं को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। जबकि साल में ज्याद से ज्यादा तीन लोगों के नाम ही ‘भारत रत्न’ के लिए घोषित किए जाने की परंपरा रही है।

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