मुख्यपृष्ठसमाचारमुलुक कैसे जाई?.... ठाणे आरक्षण केंद्र पर टिकटार्थियों का हाल बेहाल

मुलुक कैसे जाई?…. ठाणे आरक्षण केंद्र पर टिकटार्थियों का हाल बेहाल

१० में सिर्फ ५ खिड़की पर हो रहा काम
सामना संवाददाता / ठाणे । गर्मी की छुट्टियों में गांव जाने के लिए बड़ी संख्या में लोग टिकट आरक्षण केंद्रों की ओर रुख करते हैं। टिकट के लिए लाइन में लगे लोगों को किसी भी तरह की कठिनाइयों और अव्यवस्था का सामना न करना पड़े, इसके लिए हर वर्ष टिकट आरक्षण केंद्रों के बाहर तथा अंदर विशेष व्यवस्था की जाती रही है। लेकिन इस वर्ष लगता है कि रेलवे प्रशासन ने लोगों को परेशान करने का निर्णय ले लिया है। कर्मचारियों की मौजूदगी के बावजूद १० में से सिर्फ ५ खिड़कियों को चालू रखा गया है। इसकी वजह से लोगों को तत्काल आरक्षित टिकट नहीं मिल पा रहा है, जिसके बाद लाइन में लगे लोग एक-दूसरे से कहते हुए नजर आ रहे हैं कि मुलुक वैâसे जाई?
उल्लेखनीय है कि ठाणे शहर तथा उसके आसपास के उपनगरों में लाखों की संख्या में उत्तर हिंदुस्थानी रहते हैं। गर्मियों में स्कूल की छुट्टी होने के बाद बड़ी संख्या में लोग टिकटों का आरक्षण कराने में जुट जाते हैं। इस दौरान टिकटों की कालाबाजारी चरम पर पहुंच जाती है, ऐसी परिस्थिति में लोग आरक्षण केंद्रों के बाहर आधी रात से ही लाइन में लग जाते हैं। लाइन में घुसने को लेकर अक्सर वाद-विवाद होता रहता है। लिहाजा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए रेलवे पुलिस की तैनाती की जाती है और बंद रहनेवाली टिकट खिड़कियां भी खोल दी जाती हैं। ठाणे आरक्षण केंद्र पर १० खिड़कियां हैं, परंतु इस समय सिर्फ ५ पर टिकटों की बुकिंग हो रही है। उत्तर हिंदुस्थान की तरफ जानेवाली गाड़ियों में तत्काल टिकट खिड़की पर पहले नंबरवाले यात्री को ही टिकट मिलता है, ऐसे में १० की जगह केवल ५ लोगों को ही टिकट उपलब्ध हो पा रहा है।
संगठनों ने दी आंदोलन की चेतावनी
लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए ‘मातरम फाउंडेशन’ अध्यक्ष ओ.पी. मिश्रा, सर्व ‘ब्राह्मण सेवा संस्था’ के अध्यक्ष लाल बहादुर मिश्रा तथा ‘रेलवे पैसेंजर्स वेलफेयर एसोसिएशन’ के अध्यक्ष एड. दरम्यान सिंह बिष्ट ने सभी खि़ड़कियों के जल्द चालू न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। इस संबंध में ठाणे आरक्षण केंद्र की सुपरवाइजर अंजलि मैडम से बात की गई तो उन्होंने यह माना है कि ५ खिड़कियों के बंद होने से लोगों को परेशानी हो रही है। उनका कहना है कि यह आदेश डीआरएम कार्यालय से आया है। इसमें हम कुछ नहीं कर सकते हैं।

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