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कितने सांसदों ने किया आचार संहिता का उल्लंघन, कितनों पर की दंडात्मक कार्रवाई? …चुनाव ‘अयोग्य’ के पास नहीं है कोई जानकारी

सामना संवाददाता / मुंबई
२०१४ से अभी तक कितने सांसदों ने आचार संहिता का उल्लंघन किया है और कितने सांसदों पर दंडात्मक कार्रवाई की गई है, इसकी चुनाव अयोग्य के पास कोई जानकारी नहीं है। इस बात का खुलासा एक आरटीआई से हुआ है। चुनाव आयोग ने कहा है कि उसके पास आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन सहित विभिन्न उल्लंघनों के लिए सांसदों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई का कोई रिकॉर्ड नहीं है। चुनाव आयोग, जो देश में चुनाव कराने और विनियमित करने के लिए अधिकृत एक संवैधानिक निकाय है, ने स्पष्ट किया कि उसके पास सांसदों को जारी किए गए नोटिस और उसके बाद की कार्रवाई पर डेटा एकत्र नहीं है। आयोग के अनुसार, ऐसी जानकारी एकत्र करने से आयोग के संसाधनों का असंगत रूप से उपयोग होगा। संविधान का अनुच्छेद ३२४ चुनाव आयोग को भारत की संसद, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों की निगरानी, ​​निर्देशन और नियंत्रण करने का अधिकार देता है। चुनावी प्रक्रिया की अखंडता को बनाए रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के बावजूद, ईसीआई में सांसदों के निर्देशों और कार्यों के संबंध में बुनियादी रिकॉर्ड रखने की कमी दिखाई देती है। सांसदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाइयों पर व्यापक डेटा की कमी ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। ‘द यंग व्हिसलब्लोअर्स फाउंडेशन’ का प्रतिनिधित्व करने वाले एक कार्यकर्ता जितेंद्र घाडगे ने उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों द्वारा उल्लंघनों से निपटने में आयोग की स्पष्ट निष्क्रियता पर नाराजगी व्यक्त की। घाडगे ने कहा, ‘जब उम्मीदवार तथा राजनीतिक दल समाज में नफरत फैलाने वाले भाषण, अपमानजनक बयान और धार्मिक और जातिगत भेदभाव फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, तो नोटिस जारी करने से परे ठोस कार्रवाई करने में चुनाव आयोग की विफलता चिंताजनक है।’

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