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चीन ने हिंदुस्थान की कितनी जमीन हथियाई? पीएम मोदी से सुब्रह्मण्यम स्वामी का सीधा सवाल

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
पिछले करीब ढाई वर्षों से गलवान घाटी में घुस आया चीन हिंदुस्थान के बड़े भू-भाग पर कब्जा जमाए बैठे हैं। चीन, लद्दाख के अलावा अरुणाचल प्रदेश, कश्मीर में भी हिंदुस्थान के खिलाफ लगातार खुराफात कर रहा है। लेकिन केंद्र की भाजपाई सरकार और ५६ इंच का सीना होने का दावा करनेवाले उसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में सहयोगी एवं विरोधी दलों को सियासी मात देने के खेल में व्यस्त हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्हीं की पार्टी के एक बड़े सहयोगी ने आईना दिखाने का काम किया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने एक बार फिर चीन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है।
सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ट्वीट करके कहा कि अब समय आ गया है कि मोदी यह स्पष्ट करें कि चीन ने कितने अविवादित भारतीय क्षेत्र को निगल लिया है? जिसके बाद उसे हासिल करने के लिए हमें चीन से युद्ध करना होगा। सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ये भी कहा कि अगर पीएम मोदी चीन के सामने घुटने टेक रहे हैं तो हमारे पास यह कहने का नैतिक अधिकार है कि वह हिंदुस्थान की सत्ता को किसी ऐसे व्यक्ति को सौंप दें, जो यह कर सकता है। इससे पहले भी चीन के मुद्दे पर हमला बोलते हुए स्वामी ने ट्वीट किया था कि चीन से लगे हमारे सीमावर्ती इलाकों से मिली जानकारी से पता चलता है कि चीन कश्मीर के लद्दाख और पाक अधिकृत इलाकों की तरफ सुनियोजित तरीके से पैर पसार रहा है। उन्होंने पूछा है कि क्या मोदी अब भी ब्रिक्स के साथ घूमेंगे? चीन के साल १९९३ और १९९६ के समझौतों का उल्लंघन करने और एलएसी पार करने पर सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ट्विटर पर भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए लिखा था कि चीनियों के साथ दारू और डिनर कर लेने के बाद आखिर अब नींद खुल ही गई।
नूपुर शर्मा मामले में भी साधा था निशाना
गौरतलब हो कि सुब्रह्मण्यम स्‍वामी ने इससे पहले भी रोते हुए नूपुर शर्मा मामले में मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि खाड़ी देशों के सामने मोदी सरकार पूरी तरह से झुक गई है। भाजपा नेता ने सिलसिलेवार ट्वीट में लिखा था, ‘मोदी सरकार के ८ वर्षों के दौरान, भारत माता को शर्म से सिर झुकाना पड़ा क्योंकि हम लद्दाख पर चीनियों के सामने रेंगते रहे, रूसियों के सामने घुटने टेकते रहे, क्वाड में अमेरिकियों के सामने झुके रहे। अब हमने छोटे से कतर के सामने साष्टांग दंडवत कर दिया है। यह हमारी विदेश नीति की कमियां हैं।’

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