मुख्यपृष्ठखबरेंप्रदूषण से निजात कैसे पाएं?

प्रदूषण से निजात कैसे पाएं?

योगेश कुमार सोनी
देश के महानगर इस समय प्रदूषण के शिकार होते जा रहे हैं, जिसकी वजह से यहां रहने वाले लोगों की आयु अब ६० से ६५ वर्ष तक सीमित होकर रह गई। इसके साथ ही रोजाना अन्य नई बीमारियों का जन्म हो रहा है, जो हमारी आने वाली नस्ल खराब कर रही हैं। हालांकि, हम दुनिया के उस देश में रहते है, जहां जब तक बिल्कुल सिर पर ही नहीं पड़ती, तब तक हम कुछ नहीं करते। आज हर दृष्टिकोण से दिल्ली व मुंबई के अलावा अन्य कई शहर भी कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। इस सर्वे के अनुसार, रहने के चार प्रमुख क्षेत्रों को आधार बनाया गया। इनमें संस्थागत, सामाजिक, आर्थिक व बुनियादी सुविधाओं के आधार पर बेहतर रहने लायक शहरों का आकलन किया है। सुविधाओं को १५ वर्ग मे बांटकर देखा गया है। इसके अंतर्गत गवर्नेंस, स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा, आर्थिक स्थिति, पर्यावरण प्रदूषण का स्तर, आवासीय सुविधाएं, खुली हवा स्थल आदि अन्य कुछ बातों को मद्देनजर रखते हुए स्थान दिया गया है। जिन राज्यों की स्थिति बेकार बताई जा रही है उसका प्रमुख कारण अधिक जनसंख्या भी है। दिल्ली समेत कुछ अन्य राज्य ऐसे भी हैं, जहां वाहनों की संख्या से ज्यादा होने से वहां असमानता बढ़ती जा रही है। अब बात करें वायु प्रदूषण की जो इस आकलन का सबसे बड़ा आधार बना है उससे तो महानगरों का इतना बुरा हाल है कि अब लगभग पूरे वर्ष ही यहां यह समस्या रहने लगी। आपको जानकार यह आश्चर्य भी होगा कि हर राज्य में गर्मी व सर्दी की छुट्टी पड़ती है, लेकिन दिल्ली में इसके सिवाय अब पिछले दो-तीन सालों से प्रदूषण की छुट्टियां पड़ रही हैं। एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदूषण के कारण दिल्ली में रोजाना ८० लोगों की मौत हो रही है। सालाना १८,००० से ३०,००० जानें जा रही हैंै। ये आंकड़ा बेहद आश्चर्यचकित व चिंतित करने वाला है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के सबसे २० सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में १३ भारत के शहर आंके गए थे, जिसमें दिल्ली सबसे ऊपर है। एनवायर्नमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी पत्रिका में छपी इस रिपोर्ट के अनुसार, महानगरों में अधिकतर मौतें दिल की बीमारी व स्ट्रोक के कारण होती है। यहां की हवा में पार्टिकुलेट मैटर पीएम २.५ की मात्रा प्रति घन मीटर १५० माइक्रोग्राम है। यह देश मे निर्धारित सीमा का चार गुणा और डब्लूएचओ की तय सीमा का १५ गुणा है। अब दिल्ली व मुंबई के आवासीय मामले की चर्चा करें तो आधी से ज्यादा दिल्ली में अवैध कॉलोनियां बसी हुई हैं। इसका सबसे बड़ा कारण जनसंख्या का अधिक होना है। यदि दिल्ली की बात करें तो इसके अलावा अधिकारियों की मिलीभगत से यहां यमुना खादर तक में लोगों ने घर बना लिए। खैर, इसके अलावा भी कई अन्य और भी तथ्य है, जिस वजह से यहां आवासीय स्थिति पूरी तरह गड़बड़ाई हुई है। पार्किंग को लेकर मर्डर तक हो जाते हैं। जैसा कि पहले भी बताया कि रोजाना हजारों नए वाहन सड़कों पर उतरते हैं तो निश्चित तौर पर प्रदूषण की समस्या होना स्वाभाविक बात होगी। बहरहाल, अंत में निष्कर्ष यही निकलता है कि यदि महानगरों में इन सभी समस्याओं पर मंथन करके निवारण नहीं निकाला गया तो निश्चित तौर पर महानगरों की चमक-धमक से लोगों का विश्वास उठ जाएगा। साथ ही एक बड़ी महामारी की उत्पत्ति होने का खतरा कभी भी बना रहता है। इस पर अब सरकार व प्रशासन की दखलंदाजी जरूरी है, ताकि दिल्ली की नई व स्वस्थ रूपरेखा बने।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक मामलों के जानकार हैं।)

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