मुख्यपृष्ठनए समाचारकेंद्र का वित्तीय आघात ...कैसे सुधरें राज्य के हालात?

केंद्र का वित्तीय आघात …कैसे सुधरें राज्य के हालात?

• जीएसटी का ३० हजार करोड़ रुपए बकाया
• राज्य पर बढ़ता जा रहा कर्ज का बोझ

विनय यादव / मुंबई
पांच राज्यों के चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने के अनुमान विशेषज्ञों द्वारा लगाए जा रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार ने सीएनजी और पीएनजी की टैक्स दरें कम करके जरूरतमंदों को बड़ी राहत दी है। हालांकि, केंद्र सरकार की वित्तीय आघात की नीतियां राज्य की उभरती अर्थव्यवस्था के सामने कई रोड़े अटका रही हैं। केंद्र सरकार के पास राज्य के हिस्से का वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) का ३० हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि बकाया है, लेकिन केंद्र सरकार इसके भुगतान को लेकर संवेदनशील नहीं है।
आरोप लग रहे हैं कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके महाराष्ट्र सरकार को अस्थिर करने की कोशिश जारी है। भाजपा नेताओं द्वारा सरकार गिरने की तारीखें घोषित की जा रही हैं लेकिन विपक्ष की हर कोशिशें नाकाम होती जा रही हैं। इस बीच महाराष्ट्र को वित्तीय आघात भी पहुंचाया जा रहा है। मुंबई सहित महाराष्ट्र टैक्स देने में देशभर में सबसे आगे है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई न केवल देश के विकास में योगदान देती है, बल्कि बड़े पैमाने पर उद्यमियों और श्रमिकों को रोजगार देती है। देशभर में जीएसटी लागू होने के बाद महाराष्ट्र से वसूल किए गए टैक्स का ३० हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि की वापसी केंद्र की ओर से नहीं की गई है। इतनी बड़ी राशि का भुगतान न होने से राज्य की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। कोरोना संकट का मुकाबला करते हुए महाराष्ट्र सरकार सारी चुनौतियों को स्वीकार करते हुए राज्य की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों को कम करने में केंद्र करे सहयोग
चर्चा है कि वर्ष २०२२-२३ के बाद केंद्र की ओर से राज्यों को मिलनेवाली नुकसान भरपाई भी बंद हो जाएगी। इससे राज्यों की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सीएनजी और पीएनजी का १०.५ प्रतिशत टैक्स घटाकर महाराष्ट्र सरकार ने प्रदेशवासियों को बड़ी राहत दी है। हालांकि, पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। महंगाई आसमान छू रही है। इसे लेकर राज्य के उपमुख्यमंत्री व वित्त मंत्री अजीत पवार ने स्पष्ट किया है कि बिना केंद्र के सहयोग के पेट्रोल-डीजल के मूल्यवर्धित टैक्स की दर में कटौती करना संभव नहीं है। जीएसटी के तौर पर वसूल की गई राशि का हिस्सा राज्यों को दिया जाना चाहिए।
राजस्व में हर महीने रु. २४७ करोड़ की कमी
वित्त मंत्री अजीत पवार के अनुसार राज्य के राजस्व में हर महीने २४७ करोड़ रुपए की कमी आ रही है। केंद्र सरकार ने ४ नवंबर २०१९ से पेट्रोल-डीजल के दरों पर क्रमश: ५ और १० रुपए कम किए हैं, लेकिन इससे जनता को राहत नहीं मिली है। पेट्रोल-डीजल के दामों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। जबकि कोरोना संकट के दौरान भी राज्य सरकार ने पेट्रोल-डीजल के मूल्यवर्धित कर में बढ़ोतरी नहीं की है।

अन्य समाचार