मुख्यपृष्ठसंपादकीयस्वतंत्रता कैसे कहा जाए?

स्वतंत्रता कैसे कहा जाए?

हिंदुस्थान की स्वतंत्रता दिवस का अमृत महोत्सव देशभर में अभूतपूर्व उत्साह एवं जोर-शोर से मनाया जा रहा है। ७५वां स्वतंत्रता दिवस प्रत्यक्ष रूप से आज है परंतु बीते सप्ताह भर से गली से लेकर दिल्ली तक स्कूली बच्चों की प्रभात फेरियां एवं देशभक्ति के गीतों का घोष गूंज रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में दुनियाभर में उत्सव मनाने व देश में घर-घर तिरंगा फहराने का आह्वान किया था। बेशक देश का स्वतंत्रता दिवस मतलब राष्ट्र के लिए गौरव एवं देशभक्ति की अलख जगानेवाला विषय होने की वजह से प्रधानमंत्री के आह्वान को देशवासियों का उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिला है। बीते कुछ दिनों से देश के कोने-कोने में तिरंगे का वितरण चल रहा है। ये तमाम राष्ट्रध्वज अब हर घर में शान से लहरा रहे हैं और इस उत्सवी समारोह के माध्यम से देशभक्ति का एक शानदार माहौल निश्चित तौर पर तैयार हुआ है। उस पर इस बार स्वतंत्रता दिवस का यह अमृत महोत्सवी वर्ष होने के कारण इस बार के स्वतंत्रता दिवस की भव्यता कुछ अलग ही है, जो कि होनी ही चाहिए। परंतु स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव उत्साह से मनाने के दौरान ही देश के समक्ष आज जो असंख्य समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं, उन पर भी मंथन होना ही चाहिए। स्वतंत्रता का यह मंगल कलश जिन लोगों की वजह से हमें प्राप्त हुआ, उनका स्मरण करना, उनका गौरव करना ही हमारा पहला कर्तव्य होना चाहिए। लेकिन वह हम निभा रहे हैं क्या? जिस कांग्रेस पार्टी ने हिंदुस्थान की आजादी की लड़ाई का नेतृत्व किया, उसी कांग्रेस पार्टी को देश से तड़ीपार करने की घोषणा आज बार-बार की जाती है, इसे क्या कहा जाए? कांग्रेस पार्टी ने अंग्रेजों की गुलामी से देश को मुक्त कराने के लिए सर्वाधिक संघर्ष किया, उसी कांग्रेस से देश को मुक्त कराने का नारा दिया जाता होगा तो यह विद्वेषी विचार देशभक्ति के तराजू में कैसे  तौला जाए? महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, मौलाना आजाद, लोकमान्य तिलक, सरदार पटेल, स्वातंत्र्यवीर सावरकर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, अशफाकउल्ला खान, भगत सिंह, राजगुरु ऐसे असंख्य नेताओं व क्रांतिकारियों ने स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए अपने जीवन की आहुति दी। इन सभी के त्याग व बलिदान के कारण हिंदुस्थान को आजादी का फल चखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। परंतु स्वतंत्रता संग्राम के कुछ नेताओं के योगदान को नकारना तो कुछ नेताओं की सतत निंदा करना एवं उपहास उड़ाना तथा जिनका स्वतंत्रता संग्राम में योगदान नहीं था, सिर्फ उन पर देशभक्ति के स्तुति सुमन बरसाना, ऐसा नया इतिहास लिखने का प्रयास बीते कुछ वर्षों में लगातार किया जा रहा है। देश को वास्तविक आजादी २०१४ के बाद ही मिली, ऐसे विकृत विचारवाले लोग भविष्य में इतिहास को कैसे और कितना तोड़ेंगे-मरोड़ेंगे, ये आज कोई भी नहीं कह सकता है। सिर्फ इतिहास ही नहीं, बल्कि देश के संविधान को भी, लोकतंत्र भी एवं प्रमुख सरकारी संस्थानों का भी मर्जी के अनुसार सर्वनाश आज के सत्ताधारियों द्वारा किया जा रहा है। आर्थिक मोर्चे पर देश तेजी से पीछे जाता दिखाई दे रहा है। रुपए का रिकॉर्ड अवमूल्यन होने से वह रसातल में पहुंच गया है। विकास दर से जीडीपी तक सारे आलेख ताश के महल की तरह ढह रहे हैं। बेरोजगारी बेतहाशा बढ़ रही है। चीन द्वारा हिंदुस्थान में भारी घुसपैठ किए जाने के दौरान ही हिंदुस्थानी फौज के २ लाख जवानों को घर भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई होगी तो ये आजादी को खतरे में डालने के संकेत हैं। अंग्रेजों ने ‘फोड़ो और तोड़ो’ की अनीति का इस्तेमाल करके हिंदुस्थान पर डेढ़ सौ वर्षों तक राज किया। देश की वर्तमान सरकार भी इसी कुनीति का इस्तेमाल करके राजकाज चलानेवाली होगी तो इसे आजादी कैसे कहा जाए? देश के समक्ष समस्याएं असंख्य हैं और जनता के मन में सवालों का तूफान उफान मार रहा है। प्रधानमंत्री मोदी आज लाल किले से आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में देश को संबोधित करेंगे। इस मौके पर देश की समस्याओं से संबंधित किन प्रश्नों पर अमृत बूंदें छिड़की जाएंगी, यह देखना दिलचस्प होगा!

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