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कैसे होगी किसानों की आय दोगुनी? … खतरे में कृषि का विकास!

मंत्रालय नहीं खर्च कर पा रहा बजट में आवंटित पैसा
पिछले ५ साल में १ लाख करोड़ रुपए से अधिक लौटाए
हिंदुस्थान की आबादी तेजी के साथ बढ़ती जा रही है। कुछ माह पहले हमने चीन को भी इस मामले में मात दे दी है। दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बनने के बाद अब समस्या है कि इतने लोगों का पेट वैâसे भरा जाए? इसके लिए कृषि का विकास जरूरी है। मगर आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि कृषि विकास के नाम पर केंद्र सरकार फिसड्डी साबित हुई है। इस बात को खुद केंद्र सरकार भी मान रही है। कृषि मंत्रालय को जो बजट आवंटित हुआ है, वह उसे खर्च ही नहीं कर पा रहा है। कृषि मंत्रालय की एक रिपोर्ट से पता चला है कि सरकार ने हाल के वर्षों में मंत्रालय के बजट में बढ़ोतरी की है, लेकिन मंत्रालय ने इसका पूरा उपयोग नहीं किया है, क्योंकि इसने पिछले पांच वर्षों में १ लाख करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि लौटा दी है।
‘वर्ष २०२२-२०२३ के एकाउंट की एक झलक’ शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, कृषि और किसान कल्याण विभाग (डीए एंड एफडब्ल्यू) ने पिछले वित्तीय वर्ष (अप्रैल २०२२-मार्च २०२३) के दौरान अपने १.२४ लाख करोड़ रुपए के वार्षिक आवंटन में से २१,००५.१३ करोड़ रुपए वापस कर दिए। यह पिछले वर्ष २०२१-२२ के दौरान विभाग द्वारा लौटाई गई राशि का लगभग चार गुना है, जो इसके १.२३ लाख करोड़ आवंटन में से ५,१५२.६ करोड़ रुपए थी। विभाग ने २०२०-२१ में २३,८२४.५३ करोड़ रुपए, २०१९-२० में ३४,५१७.७ करोड़ रुपए और २०१८-१९ में २१,०४३.७५ करोड़ रुपए लौटाए थे। इसके अलावा कृषि मंत्रालय के तहत आने वाले कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग ने २०२२-२३ में अपने कुल आवंटन ८,६५८.९१ करोड़ रुपए में से ९ लाख रुपये, २०२१-२२ में १.८१ करोड़ रुपए, २०२०-२१ में ६०० करोड़ रुपए, २०१९-२० में २३२.६२ करोड़ और २०१८-२०१९ में ७.९ करोड़ रुपए वापस लौटा दिए हैं। वित्तीय वर्ष २०१८-१९ के दौरान केंद्र द्वारा पीएम किसान सम्मान निधि शुरू करने के साथ कृषि मंत्रालय के तहत आने वाले इन दोनों विभागों का संयुक्त बजट उस वित्त वर्ष में ५४,००० करोड़ रुपए (या केंद्र के २४.४२ लाख करोड़ रुपए के कुल बजट का २.३ प्रतिशत) से बढ़कर २०२२-२३ में १.३२ लाख करोड़ रुपए (या कुल ३९.४४ लाख करोड़ रुपए का ३.५ प्रतिशत) हो गया। पिछले पांच वर्षों में इस योजना का वार्षिक आवंटन २०,००० करोड़ रुपए से ७५,००० करोड़ रुपए के बीच रहा है। हालांकि, शायद धन का उपयोग न होने के कारण सरकार ने चालू वित्त वर्ष २०२३-२४ के दौरान मंत्रालय के कुल आवंटन को २०२२-२३ में १.३२ लाख करोड़ रुपए से मामूली रूप से घटाकर १.२५ लाख करोड़ रुपए कर दिया है। कृषि मंत्रालय द्वारा फंड लौटाने के मुद्दे को पीसी गद्दीगौदर की अध्यक्षता वाली कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण पर स्थायी समिति ने भी उजागर किया है और सरकार से फंड वापस लौटाने से बचने के लिए कहा है। १३ मार्च, २०२३ को संसद के समक्ष प्रस्तुत कृषि और किसान कल्याण विभाग की अनुदान मांग (२०२३-२४) पैनल रिपोर्ट में कहा गया है, ‘धन लौटाना मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों, अनुसूचित जाति उप-योजना और जनजातीय क्षेत्र उप-योजना घटकों के तहत कम आवश्यकता के कारण है।’ गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का नारा दिया है। मगर जब कृषि के प्रति सरकार का ऐसा नजरिया रहेगा तो फिर कृषि का विकास खतरे में ही रहेगा।

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