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व्यंग्य : बेरुखी दिल में घर कर गई है, आज इंसानियत मर गई है

देर रात तक मोबाइल में लगा रहने के कारण वह रोज की तरह आज भी सुबह देर से सोकर उठा। आदतन सबसे पहले उसका हाथ सिरहाने के बाजू में रखी छोटी टेबल पर चार्ज हो रहे मोबाइल पर गया। अधखुली आंखों से उसने फेसबुक खोला… कल रात की अपनी पोस्ट पर आए हुए लाइक और कॉमेंट्स देखे। चेहरे पर थोड़ी नाराजगी मिश्रित लाचार संतुष्टि के भाव आए, लेकिन तुरंत ही उसने खुद को संयत कर लिया। एक नज़र बाजू में ड्रेसिंग टेबल के आईने पर डाली। बाएं हाथ की उंगलियां बालों में फिराई और तकिए की टेक लगाकर पलंग पर अधलेटा सा बैठ गया।

इतने में फिर मोबाइल पर किसी नोटिफिकेशन का साउंड सुनाई दिया। उसकी आंखें फिर से स्क्रीन पर चिपक गर्इं। उसके फेसबुक फ्रेंड्स के आज पड़ने वाले जन्मदिन से संबंधित नोटिफिकेशन था। उसने क्लिक किया, कुछ खास खास दो चार मित्रों को happyed birthdayed का मैसेज भेजा। जो थोड़े कम खास थे, उन्हें hBD लिखकर मुक्ति पाई और जो इत्यादि टाइप थे, उनको इग्नोर करता हुआ आगे बढ़ गया। उसका चपल अंगूठा तेजी से स्क्रॉल करने लगा। जो भी पोस्ट सामने आती, सबको सम भाव से लाइक का बटन दबाते हुए आगे बढ़ जाता। कुछ लोग जो उसकी पोस्ट पर नियमित रूप से कॉमेंट्स किया करते थे, उनकी पोस्ट पर एक पल ठिठक कर थोड़ा पढ़ लेता।

पढ़ते-पढ़ते आजकल उसमें लेखन का कीड़ा भी पैदा हो गया था और इधर-उधर से टापकर अपनी वाल पर चेंपने से भी उसे कोई परहेज नहीं था। मठाधीशों की चरण वंदना करना और नियमित रूप से उनका आशीर्वाद लेना उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था। जब भी उसका जन्मदिन पड़ता, तो वह दो-चार दिन पहले से ही गुरुजनों की गर्दन दबोचकर या जी हुजूरी करके उनसे वीडियो संदेश मंगा लेता और उस वीडियो संदेश को अपनी वॉल पर उन्हें पुन: साष्टांग दंडवत करते हुए ठेल देता।

अनमने भाव से उसका अंगूठा लगातार स्क्रॉल कर रहा था। किसी मित्र की शादी की वर्षगांठ थी, उसने लाल वाले दिल के साथ रेडीमेड वाला हैप्पी एनिवर्सरी का मैसेज ठोक दिया। आगे बढ़ा.. किसी का रिश्तेदार हॉस्पिटल में एडमिट था, उसने तुरंत हैप्पी एनिवर्सरी वाले मैसेज से कैरी फॉरवर्ड करके लाई हुई मुस्कान होठों पर बिखेरे “get ewòed soon” का कॉमेंट कर दिया। इस बीच पत्नी कब उसके टेबल पर चाय रख गई थी, उसे पता भी नहीं चला। जब चाय की खुशबू भरी भाप उसके नथुनों से टकराई, तब तक किसी की मृत्यु की पोस्ट स्क्रीन पर आ चुकी थी। उसने दाहिने हाथ में चाय का कप लेकर इत्मीनान से चाय सुड़कते हुए बाएं हाथ से “RIP” टाइप किया और बगैर समय गंवाए आगे बढ़ गया।

उसकी नजर दीवार घड़ी पर पड़ी, ऑफिस जाने के लिए देर हो रही थी। और उसे आज की पोस्ट भी डालनी थी, कुछ देर यूं ही सोचता और शून्य में ताकता हुआ वह सहज रूप से अपनी प्रोफाइल पर आ गया.. जहां खाली स्क्रीन पर लिखा था -“write somthing here” एक पल वह उसे एकटक घूरता रहा, इतने में उसे ध्यान आया की कल रात वाली पोस्ट पर कुछ लाइक्स बढ़े या नहीं, सो उसने पुन: चेक किया और लाइक्स की संख्या यथावत पाकर हृदय को कठोर करते हुए लिखा…

बेरुखी दिल में घर कर गई है
आज इंसानियत मर गई है।।

– शेखर ‘अस्तित्व’

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