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आधे चांद पर बस सकते हैं इंसान! … स्टोन एज से करनी होगी शुरुआत

• कुछ हिस्सों में तापमान भी हो सकता है अनुकूल
• रिहायशी इलाकों से दूर हो सकता है पानी

हिंदुस्थान के ‘चंद्रयान ३’ के चांद पर सफल लैंडिंग करने के साथ ही पूरे देश में उत्साह छाया हुआ है। पर इसके साथ ही एक सवाल आम आदमी के मन में पैदा हो रहा है कि कल को वहां इंसान के बसने की कोई संभावना है क्या? आखिर इतनी मेहनत क्यों की जा रही है? तो इसका जवाब है कि फिलहाल तो वैज्ञानिक चांद पर इसी संभावना को खोज रहे हैं और उम्मीद में ही जीवन है। ऐसे में भविष्य में वहां इंसानी बस्ती के बसने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
दरअसल, चांद पर जीवन को लेकर लंबे समय से रिसर्च चल रही है। अब हाल ही में एक रिसर्च में इसे लेकर अच्छी खबर आई है। इसमें बताया गया है कि चांद के आधे इलाके में तापमान इतना अनुकूल है कि वहां इंसान आराम से रह सकता है। ऐसे में इंसानों के चांद पर जीवन की संभावना बढ़ रही है। चूंकि चांद पर फिलहाल मिट्टी-पानी के अलावा कुछ और नहीं है तो इंसान को वहां स्टोन एज से शुरुआत करनी होगी। जहां तक पानी का सवाल है तो उसके अंश साउथ पोल की तरफ मिले हैं, ऐसे में आशंका है कि अगर चांद पर इंसानी बस्तियां बसती हैं तो रिहायशी इलाकों से पानी की दूरी ज्यादा हो सकती है।
डीडब्ल्यू की एक रिपोर्ट के अनुसार, चांद पर गुफाओं की तरह के कुछ स्ट्रक्चर हैं, जो आने वाले वक्त में इंसानों की सुरक्षा कर सकते हैं। रिसर्च में बताया गया है कि जहां भी इंसानों के हिसाब से तापमान है, वहां कुछ गड्ढे हैं और उन गड्ढों में पृथ्वी के हिसाब से तापमान है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों के अनुसार, वहां १७ डिग्री सेल्सियस तक का तापमान पाया गया है। हालांकि, चांद की तहत पर तापमान काफी बदलता रहता है। चांद की अधिकांश सतह पर दिन के वक्त २६० डिग्री तक तापमान रहता है और रात में यह तापमान जीरो से २८० डिग्री नीचे तक आ जाता है। अब कुछ स्थानों पर स्थिर तापमान से लग रहा है कि आने वाले वक्त में यहां पर जीवन की संभावना बढ़ सकती है। खास बात ये है कि जिन क्षेत्रों या गड्ढों में तापमान कम है, वहां सौर विकिरण, अन्य हानिकारक किरणों और छोटे उल्कापिंडों से भी बचा जा सकता है। चंद्रमा पर एक दिन या रात पृथ्वी पर दो हफ्ते से थोड़े अधिक के बराबर है। इस वजह से वहां काफी मुश्किलें भी हैं। रिसर्च के अनुसार, २०० से अधिक खोजे गए गड्ढों में से करीब १६ लावा ट्यूब की वजह से हैं। इनकी खोज साल २००९ में ही कर ली गई थी। इसके अलावा हिंदुस्थान के पहले चंद्रयान ने वहां पानी की भी खोज कर ली है। पानी इंसान के जीवन के लिए सबसे जरूरी चीज है। ऐसे में वैज्ञानिकों को इस बात की पूरी उम्मीद है कि आनेवाले वर्षों में चांद पर इंसानी बस्तियां बसाई जा सकती हैं।

जीवन की संभावना तलाशेगा रोवर
चंद्रयान-३ से चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा लैंडर और रोवर चंद्रमा पर जीवन की संभावनाएं तलाशेगा। इस सॉफ्ट लैंडिंग के बाद वैज्ञानिकों को चांद पर इंसानों के बसने की एक नई उम्मीद भी जाग उठी है। अब तक चांद पर पानी होने और अन्य तरह के अंदाज लगाए जाते रहे हैं। चंद्रयान-२ के आर्बिटर से भी चांद पर पानी की मौजूदगी का संकेत मिला था। अब इस मिशन के बाद चांद पर मौसम कैसा होता है, वहां के वायुमंडल में किन-किन गैसों की मौजूदगी है, चांद पर क्या जीवन संभव है या नहीं, आदि रहस्यों से पर्दा उठने की उम्मीद है।

चांद पर कुछ इलाकों में इतना तापमान है कि वहां इंसान आराम से रह सकता है। ऐसे में चांद पर इंसानों के रहने की संभावना बढ़ रही है।’

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