मुख्यपृष्ठनए समाचारगुनगुनाता ब्रह्मांड! १९० वैज्ञानिकों ने गुरुत्वाकर्षण तरंगों को सुना

गुनगुनाता ब्रह्मांड! १९० वैज्ञानिकों ने गुरुत्वाकर्षण तरंगों को सुना

अगर आपको कोई ये कहे कि ब्रह्मांड भी गुनगुनाता है तो आपको यकीन नहीं होगा, पर यह सच है। सालों की कड़ी मेहनत के बाद दुनिया भर के खगोलविदों की एक टीम को बड़ी सफलता हासिल हुई है। उन्होंने पहली बार ब्रह्मांड में गूंजती गुरुत्वाकर्षण तरंगों को सुना है। खास बात यह है कि गुरुत्वाकर्षण तरंगों के अस्तित्व की भविष्यवाणी महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने पहले ही कर दी थी। इस खोज में ७ हिंदुस्थानी संस्थानों के वैज्ञानिक भी शामिल थे। कम तीव्रता वाली गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाने के लिए दुनिया में छह रेडियो दूरबीनों का उपयोग किया गया था। इनमें पुणे स्थित मेट्रोवेव रेडियो टेलीस्कोप (यूजीएमआरटी) भी शामिल है।
खोज से जुड़ी जानकारी इसी महीने ‘द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स’ में प्रकाशित हुई है। इस खोज पर दुनिया भर के करीब १९० वैज्ञानिकों की एक टीम पिछले १५ साल से काम कर रही थी। पुणे स्थित मेट्रोवेव रेडियो टेलीस्कोप (यूजीएमआरटी) को ब्रह्मांड से सिग्नल इकट्ठा करने और गुरुत्वाकर्षण तरंगों की पुष्टि करने के लिए उनकी सटीकता बढ़ाने का काम सौंपा गया था। रिपोर्ट के अनुसार, माना जाता है कि गुरुत्वाकर्षण तरंगें हमारे प्रारंभिक ब्रह्मांड में सुपरमैसिव ब्लैक होल के विलय से उत्पन्न हुई थीं। इस खोज से वैज्ञानिकों को ब्लैक होल के विलय से जुड़े रहस्यों का पता लगाने में मदद मिलेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, यह खोज साल २००२ में शुरू हुई थी। साल २०१६ में इसमें इंडियन पल्सर टाइमिंग ऐरे को भी जोड़ा गया था। इसका उद्देश्य कम आवृत्ति वाली नैनो हर्ट्ज गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाना भी है।
यहां के वैज्ञानिकों ने सुना
इसके प्रयोगों में एनसीआरए (पुणे), टीआईएफआर (मुंबई), आईआईटी (रुड़की), आईआईएसईआर (भोपाल), आईआईटी (हैदराबाद), आईएमएससी (चेन्नई) और आरआरआई (बंगलुरु) के साथ-साथ जापान के कुमामोटो विश्वविद्यालय के शोधकर्ता शामिल थे। गुरुत्वाकर्षण तरंगें सबसे पहले अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा वर्ष १९१६ में प्रस्तावित की गई थीं। अब उनकी धीमी पिच को सुना जा सकता है। जब ब्लैक होल विलीन होते हैं तो गुरुत्वाकर्षण तरंगें उत्पन्न होती हैं। इस खोज के बाद वैज्ञानिक ब्लैक होल को और अधिक गहराई से समझ सकेंगे।

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