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पोइसर नदी के उफान से नहीं डूबेंगे झोपड़े!

  • मनपा ने १५ दिनों में तैयार की सुरक्षा दीवार
  •  वर्षा जल संचयन विभाग की कीर्ति

सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई के आर/दक्षिण क्षेत्र में बहनेवाली पोइसर नदी के उफान से अब उसके किनारे और आसपास बसे झोपड़े नहीं डूबेंगे। मनपा के वर्षा जल संचयन विभाग ने युद्धस्तर पर काम करते हुए महज १५ दिनों में ही नदी के किनारे सुरक्षा दीवार को खड़ा कर कीर्ति स्थापित की है। प्रशासन के मुताबिक इस सुरक्षा दीवार को बनाने के लिए नदी के किनारे बसे २९ झोपड़ों को हटाना पड़ा है। प्रशासन को विश्वास है कि कांदिवली में डहाणुकर वाड़ी क्षेत्र के नागरिकों को इस मानसून में बाढ़ से राहत मिलेगी।
कांदिवली पश्चिम स्थित डहाणुकर वाड़ी क्षेत्र में बहनेवाली पोइसर नदी राजीव गांधी राष्ट्रीय अभयारण्य में एक पर्वत शृंखला से निकलती है, जो मालाड-पूर्व में क्रांतिनगर झोपड़पट्टी से होते हुए शहर में प्रवेश करती है। कई वार्डों से होकर बहनेवाली इस नदी की धारा कांदिवली-पश्चिम में डहाणुकर वाड़ी में आबादी के कारण दो धाराओं में विभाजित है। आगे दोनों धाराएं एक साथ आकर मालाड पश्चिम स्थित मार्वे खाड़ी में मिल गई हैं।
संकरी हो गई थी धारा
डहाणुकरवाड़ी बस्ती से अलग होने वाली दो धाराओं में से ‘बी’ धारा नदी तल में झोपड़ियों के अतिक्रमण के कारण बहुत संकरी हो गई थी। साथ ही उस स्थान पर बना पुल बारिश के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा डाल रहा था। ऐसे में भारी बारिश की स्थिति में डहाणुकरवाड़ी क्षेत्र के निवासियों को बाढ़ के कारण विकट स्थिति का सामना करना पड़ता है।
साल २०१८ में बनाई गई थी संकरे नदी को चौड़ा करने की योजना
यहां के नागरिकों को इस समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए राजनीतिक दल रास्ता निकालने की लगातार मांग प्रशासन से कर रहे थे। मनपा प्रशासन ने भी समय-समय पर कई उपाय करते हुए प्रयास किए। इसके तहत साल २०१८ में संकरे नदी को चौड़ा करने की योजना बनाई गई। हालांकि यहां बसे झोपड़ाधारकों की विभिन्न मांगों के चलते और इससे उत्पन्न होनेवाली तकनीकी और प्रशासनिक कठिनाइयों के कारण आर/दक्षिण वार्ड के लिए ‘बी’ धारा के किनारे बसी झोपड़ियों को हटाना संभव नहीं था। नतीजतन वर्षा जल संचयन विभाग भी इस स्थान पर नदी की नियोजित चौड़ीकरण को अंजाम नहीं दे सका।
तेजगति से शुरू हुआ काम
नौ मई को हुई चर्चा में मनपा के अतिरिक्त आयुक्त पी वेलरासु ने मामले में विशेष ध्यान देकर तत्काल मार्ग निकालने का आदेश दिया था। आदेश के बाद मनपा प्रशासन ने तेजगति से कार्रवाई शुरू कर दी। इसके तहत नदी में बारिश के पानी की धारा में बाधा डालने वाले २९ झोपड़ियों को खाली करा उसे जमींदोज किया गया। इसके बाद सुरक्षा दीवार बनाने का काम युद्धस्तर पर शुरू किया गया, जिसे १५ दिनों में पूरा कर लिया गया।

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