" /> ‘मैं इंकार नहीं कर सकी!’-शैली प्रिया पांडे

‘मैं इंकार नहीं कर सकी!’-शैली प्रिया पांडे

पटना के एक उच्च मध्यमवर्गीय पढ़े-लिखे परिवार से ताल्लुक रखनेवाली टैलेंटेड और आकर्षक नैन-नक्शवाली अभिनेत्री शैली प्रिया पटना से मुंबई आईं  और इस समय वे शो ‘पवित्रा- भरोसे का सफर’ में पवित्रा की शीर्षक भूमिका निभा रही हैं। इस रोल को पाने के लिए उन्हें काफी मशक्कतें करनी पड़ी। इस शो से पहले उन्होंने ‘जी’ व ‘सोनी’ के लिए भी शोज किए हैं। पेश है, शैली प्रिया से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

♦ अपने बारे में कुछ बताएंगी?
मेरा जन्म पटना में हुआ लेकिन पढ़ाई के लिए मुझे लखनऊ जाना पड़ा। लखनऊ के बाद चंडीगढ़ और फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी से मैंने स्नातक की डिग्री ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी में मुझे थिएटर करने का काफी मौका मिला। अभिनय के प्रति चाहत बढ़ने के कारण मैं धीरे-धीरे ऑडिशंस देने लगी और ‘क्वीन्स’ टीवी धारावाहिक के लिए मेरा सिलेक्शन हो गया और मैं मुंबई आ गई।

♦ आपके मुंबई आने पर क्या घरवालों को आपत्ति नहीं हुई?
मेरे घर में उस वक्त हड़कंप मच गया जब मैंने दिल्ली के बाद मुंबई जाना चाहा। ‘क्वीन्स’ की शूटिंग मुंबई में होनी थी इसलिए शो में मेरा सिलेक्शन होने के बाद मुझे मुंबई आमंत्रित किया गया। मेरा परिवार नहीं चाहता था कि मैं एक्टिंग में अपना करियर बनाऊं। ये बात परिवारवालों के दिमाग में नहीं आई कि एक्टिंग भी एक अच्छा-खासा आय देनेवाला और सम्माननीय करियर ऑप्शन हो सकता है। मैं पढ़ने में तेज रही हूं, लेकिन पढ़ाकू नहीं थी। मेरे चाचाजी एनएसडी में थे और वे थिएटर की अहमियत समझते थे इसलिए उनका सपोर्ट मुझे मिला और मेरे लिए मुंबई आना संभव हुआ।

♦आपको ‘पवित्रा-भरोसे का सफर’ शो किस तरह से मिला?
‘पवित्रा-भरोसे का सफर’ ये ‘आजाद टीवी’ का लॉन्चिंग शो था इसीलिए चैनल किसी प्रकार का कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था। शुरुआत में पवित्रा के रोल के लिए छोटी लड़कियों का ऑडिशन लिया गया। उसके बाद उन्होंने युवा लड़कियों का ऑडिशन लेना शुरू किया और कई ड्रेसेस में मेरे ऑडिशन होते चले गए।

♦ सुना है इस शो को पाने के लिए आपने छोटी-सी चालाकी की थी?
‘पवित्रा’ एक टैक्सी ड्राइवर की बेटी है। अपने पिता की जिम्मेदारियों का बोझ उठाने के लिए वो टैक्सी चलाने का जिम्मा खुद उठाती है। अब जाहिर-सी बात है पवित्रा को टैक्सी चलानी पड़ेगी। पटना में मैंने सायकिल-टू व्हीलर चलाया है लेकिन फोर व्हीलर चलाना मुझे नहीं आता था। चैनल के साथ ही निर्देशक ने जब मुझसे पूछा कि तुम्हें कार चलाना आता है। ये सवाल मेरे लिए बड़ा कठिन था। लेकिन मैं इंकार नहीं कर सकी। अगर मैं इंकार करती तो शो हाथ से चला जाता और हां कहने पर जब टैक्सी चलाने को कहा जाएगा तो मेरा भंडा फूट जाएगा। वक्त की नजाकत को समझते हुए मैंने उनसे कह दिया कि मैं कार चलाना जानती हूं। इसके बाद मैंने एक ट्रेनर ड्राइवर अपॉइंट किया जो मुझे आठ दिनों में कार चलाना सिखा सके।

♦ क्या आठ दिनों में आप मुंबई की सड़कों पर कार चला सकीं?
नहीं, पहली बार मैंने मेरठ की सड़कों पर टैक्सी चलाई तो मेरी खुशियों का कोई ठिकाना नहीं रहा।

♦ क्या महिला और पुरुष कलाकार में भेदभाव दिखने पर आपने उस भेदभाव के प्रति कभी प्रतिक्रिया व्यक्त की?
महिला और पुरुष कलाकारों को मिलनेवाले पारिश्रमिक में पहले भेदभाव था, लेकिन अब ये ९० प्रतिशत खत्म हो गया है। टीवी इंडस्ट्री पूरी तरह से महिला प्रधान है। अगर मैं ये कहूं कि यहां सिर्फ महिलाओं का बोलबाला है, तो ये कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

♦ अगर आपको ओटीटी प्लेटफॉर्म पर काम करने का मौका मिले तो मानसिक रूप से आप बोल्ड और इंटिमेट सीन के लिए कितनी तैयार हैं?
मेरी राय में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर काफी अच्छी रिलेटेबल कहानियां नजर आ रही हैं। लेकिन बोल्ड किरदार के लिए स्किन शो जरूरी नहीं है। जब ऐसा किरदार आएगा, उस समय देखा जाएगा।