मुख्यपृष्ठनए समाचारमेरी जिनगी में खुसियां तिहरे बहाने सूं एँ

मेरी जिनगी में खुसियां तिहरे बहाने सूं एँ

संतोष मधुसूदन चतुर्वेदी

एक लुगाई कुं बियाओ के कछु बरस बाद यै खयाल आयौ की अगर वौ अपने खसम कुं छोड़के कहूं चली जायै तौ वौ कैसो म्हेसूस करेगौ? लुगाई नें अपने याई बिचार कुं जानबे परखबे के लियें एक कोरे कागद पै लिखौ, ‘अब मै तिहारे संग औरु नाँय रह सकौं, मै ऊब गयी ओं तिहारे संग सूं, मै घर छोड़के हमेसा-हमेसा के लियें जाय रही ह्यों।’ लुगाई नें कागद कुं तिपाई पै रखौ और जब खसम के आयबे कौ समै भयौ तौ बा की प्रतिक्रिया देखबे के लियें वौ पलका के नीचें दुबक गयी। खसम आयौ और बानें तिपाई पै रखे कागद कुं पढ़ो। कछू देर की चुप्पी के बाद खसम नें बा कागद पै कछू लिखौ और फिर वौ खुस है कुं जोर-जोर सों सीटी बजामते भये…‘पंछी बनूं उड़ता फिरूँ मस्त गगन में, आज मैं आजाद हूं दुनिया के चमन में’ गीत गामते भये उछर-उछर कुं नाचन लगौ औरु फिर वौ अपने लत्ता बदलन लगौ। ‘भली-बुरी सबकी सुनी/बहुत सह्यो अपमान/पढ़े-लिखेन में फंस गयौ/मैं मूरख नादान’ बाद मै बा नें अपने फोन सों काऊ कौं फोन लगायौ और कहन लगौ…
‘आज मै मुक्त है गयौ सियात मेरी मूरख लुगाई कौं समझ आय गयौ की वौ मेरे लायक ई नायनी या लियें आज वौ घर सों हमेसा-हमेसा कुं चली गयी, अब मै आजाद हों, तोसों मिलबे के लियें, मै आय रह्यो तिहारे पास, तू तैयार हैंके मेरे घर के सामने वारे मैदान में अभी आय जइयो।’ फोन रखकें वौ भार निकस गयौ, बाके जाइबे के बाद लुगाई टसुआ टपकाती, बिलखती, फिफियाती भयी पलका के नीचे सों निकसी औरु कपकपाते हाथन सों कागद पै लिखी लाइन पढ़ी…जामें लिखौ ओ, ‘पलका के नीचे सों तिहारे पाम दीख रहे एँ पगली, मैदान के जौरें बारी दुकान सूं दूध, ब्रेड लैकें तुरंत आय रह्यो…जब तलक चाय कौ पानी औरु करहिया मै तेल कुं गरम करकें रखियो। दोनों संग मिलकें ब्रेड-पकौड़ा औरु ताती-ताती चाय कौ आनंद लेमिंगे। मेरी जिनगी में खुसियां तिहरे बहाने सूं एँ…आधी तोय सताइबे सूं एँ, आधी तोय मनाइबे सूं एँ!!’

अन्य समाचार

कुदरत

घरौंदा